आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में विभिन्न फूड और ग्रोसरी डिलीवरी कंपनियों से जुड़े हजारों डिलीवरी पार्टनर्स के लिए राहत की खबर सामने आई है। सरकार द्वारा '10 मिनट की क्विक डिलीवरी' की बाध्यता को खत्म किए जाने के फैसले का राइडर्स ने दिल खोलकर स्वागत किया है। शनिवार, 17 जनवरी 2026 को आगरा के डिलीवरी बॉयज ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पहले समय सीमा के दबाव में अक्सर तेज रफ्तार के कारण सड़क दुर्घटनाओं का डर बना रहता था, लेकिन अब वे बिना किसी मानसिक तनाव के सुरक्षित सफर कर सकेंगे। हालांकि, इस राहत के साथ ही राइडर्स ने अपनी खराब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए सरकार से एक और गुहार लगाई है। उनकी मांग है कि बढ़ती महंगाई और महंगे पेट्रोल को देखते हुए कंपनियों को उनके पेआउट और ईंधन भत्ते में बढ़ोतरी करने के निर्देश दिए जाएं।
According to the delivery partners, the current payout of ₹3 to ₹4 per order is insufficient to cover even their daily fuel expenses and vehicle maintenance. आगरा के एक डिलीवरी बॉय मनोज ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि वे दिन में 12-12 घंटे काम करने के बाद भी मुश्किल से ₹300 से ₹400 ही बचा पाते हैं। मनोज के अनुसार, कई बार डिलीवरी के दौरान बाइक फिसलने या दुर्घटना होने पर कंपनी इलाज या वाहन की मरम्मत में कोई सहयोग नहीं करती, जिससे उन पर आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है। राइडर्स का कहना है कि जिस संवेदनशीलता के साथ सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए समय की पाबंदी हटाई है, उसी तरह उनके आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए ताकि वे अपने परिवारों का भरण-पोषण सम्मानजनक तरीके से कर सकें।
The demand for a standardized pay structure comes at a time when the gig economy is under scrutiny for worker rights and fair compensation. आगरा के राइडर्स ने सरकार से अपील की है कि वह कंपनियों के साथ बातचीत कर एक न्यूनतम डिलीवरी शुल्क और एक्सीडेंट इंश्योरेंस की व्यवस्था सुनिश्चित कराए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पेट्रोल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि ने उनके मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित कंपनियां इन 'अदृश्य श्रमवीरों' की मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं। फिलहाल, 10 मिनट के नियम से मुक्ति ने उनके चेहरों पर मुस्कान जरूर बिखेरी है, लेकिन पेट पालने की जद्दोजहद अब भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।