देहरादून: उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में 'वीआईपी' (VIP) के नाम के खुलासे और आरोपियों को बचाने के आरोपों को लेकर प्रदेश का सियासी और सामाजिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष समिति मंच ने गुरुवार को देहरादून के कचहरी परिसर स्थित शहीद स्मारक में एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें सर्वसम्मति से 8 फरवरी को राजधानी में एक विशाल 'महापंचायत' आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इस बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों और जन सरोकारों से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सरकार पर इस मामले में तथ्यों को दबाने का आरोप लगाया। मंच की प्रमुख सदस्य कमला पंत ने स्पष्ट किया कि जब तक अंकिता को पूर्ण न्याय नहीं मिल जाता और कथित वीआईपी का चेहरा बेनकाब नहीं होता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
The struggle committee has demanded a Supreme Court-monitored CBI inquiry, specifically questioning why the Uttarakhand Police prioritized an FIR by environmentalist Anil Joshi over the formal memorandum submitted by Ankita's parents. संघर्ष मंच से जुड़े मोहित डिमरी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अंकिता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर जांच की मांग की थी, तो उसे ही आधार बनाकर कार्रवाई क्यों नहीं की गई? वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पर्यावरणविद अनिल जोशी की प्राथमिकी को आधार बनाना जांच की दिशा मोड़ने का प्रयास हो सकता है। महापंचायत में अंकिता के माता-पिता की मांग को मुख्य आधार बनाने, अभिनेत्री उर्मिला के गायब होने के मामले में स्वामी दर्शन भारती की भूमिका की जांच करने और वसंत विहार पुलिस में दर्ज अनिल जोशी की शिकायत को रद्द करने की मांग भी उठाई जाएगी।
The call for the Mahapanchayat is expected to gather thousands of people from across the hills of Uttarakhand, intensifying pressure on the state government. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे इस मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे और 8 फरवरी की महापंचायत के माध्यम से सरकार को स्पष्ट संदेश देंगे कि जनशक्ति अब और चुप नहीं बैठने वाली है। मंच ने यह भी मांग की है कि जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश द्वारा की जाए ताकि किसी भी प्रकार के राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना न रहे। फिलहाल, प्रशासन ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, जबकि संघर्ष समिति ने गांव-गांव जाकर लोगों को इस महापंचायत में शामिल होने के लिए लामबंद करना शुरू कर दिया है।