अयोध्या: अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभावित दौरे की खबरों ने रामनगरी के साधु-संतों के बीच आक्रोश और बहस का माहौल पैदा कर दिया है। हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास सहित कई वरिष्ठ धर्माचार्यों ने राहुल गांधी की तुलना पौराणिक पात्र 'कालनेमि' से करते हुए उन्हें गिरगिट की तरह रूप बदलने वाला बताया है। संतों का तर्क है कि जिस पार्टी ने राम मंदिर के अस्तित्व के खिलाफ कोर्ट में 17 वकील खड़े किए और राम सेतु को काल्पनिक बताया, उसके नेता का मंदिर आना केवल एक राजनीतिक ढोंग है। महंत राजू दास ने कड़े शब्दों में कहा कि हिंदुओं को 'हिंसक' बताने वाले और मंदिरों को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाले नेताओं की असलियत जनता जानती है और सनातन समाज ऐसे 'छद्म भेषधारियों' से पूरी तरह सचेत है।
अयोध्या के संतों ने राहुल गांधी की इस यात्रा के समय पर भी सवाल उठाए हैं, इसे आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से प्रेरित एक चुनावी स्टंट करार दिया है। महामंडलेश्वर विष्णु दास और सीताराम दास महाराज ने सवाल किया कि यदि राहुल गांधी की आस्था सच्ची है, तो वे रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर क्यों नहीं आए? संतों का आरोप है कि कांग्रेस हमेशा से तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है और अब जब उन्हें अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती दिख रही है, तो वे राम की शरण में आने का नाटक कर रहे हैं। संतों ने चेतावनी दी है कि मजारों पर चादर चढ़ाने वाले और सनातन संस्कृति की अवहेलना करने वाले लोगों को भगवान राम का दर्शन करने से कोई लाभ नहीं मिलेगा जब तक कि उनके 'डीएनए' और नियत में सुधार न हो।
हालांकि, इस विरोध के बीच कुछ संतों का स्वर थोड़ा नरम भी दिखाई दिया। हनुमानगढ़ी के देवेशाचार्य महाराज ने कहा कि राम की शरण में आने वाले हर व्यक्ति का स्वागत है और यदि राहुल गांधी देर से ही सही, रामलला के चरणों में शीश नवाते हैं, तो शायद उनका और उनकी पार्टी का कल्याण हो जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि राहुल गांधी को राजनीति से ऊपर उठकर प्रभु राम के जीवन और आदर्शों से सच्ची प्रेरणा लेनी चाहिए। फिलहाल, अयोध्या के प्रमुख मंदिरों और अखाड़ों में राहुल गांधी के दौरे को लेकर विरोध के स्वर तेज हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व की राह रामनगरी में इतनी आसान नहीं होने वाली है।