नई दिल्ली/तेहरान: ईरान में पिछले दो हफ्तों से जारी हिंसक जन-आंदोलन और सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब एक बेहद गंभीर रूप ले लिया है, जिससे वहां रह रहे करीब 10,000 से 12,000 भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, देशव्यापी झड़पों में मृतकों का आंकड़ा 2,500 के पार पहुँच चुका है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 14 जनवरी 2026 को एक आपातकालीन एडवाइजरी जारी कर सभी भारतीयों, विशेषकर छात्रों, पर्यटकों और कारोबारियों को उपलब्ध वाणिज्यिक उड़ानों के जरिए तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है।
The crisis has hit the Indian student community hardest, particularly the nearly 3,000 Kashmiri students pursuing medical studies in Iran. श्रीनगर में छात्रों के परेशान परिजनों ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से 'ऑपरेशन सिंधु' जैसी किसी विशेष निकासी योजना को फिर से शुरू करने की अपील की है। इंटरनेट ब्लैकआउट और कड़े प्रतिबंधों के कारण छात्रों से संपर्क करना लगभग असंभव हो गया है, जिससे अभिभावकों में भारी हताशा है। हालांकि दूतावास ने नागरिकों को स्वयं के इंतजाम से निकलने को कहा है, लेकिन परिजनों का तर्क है कि उड़ानों की कमी और तकनीकी बाधाओं के बीच छात्रों का अकेले निकलना जोखिम भरा है।
Beyond the humanitarian crisis, India's strategic and economic interests are at a crossroads as the $500 million Chabahar Port project faces uncertainty due to regional instability. भारत-ईरान व्यापार, जो 2019 के $17.6 बिलियन से गिरकर अब महज $1.68 बिलियन रह गया है, इस अशांति से और अधिक प्रभावित होने की आशंका है। विशेष रूप से बासमती चावल के निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि ईरान भारत का सबसे बड़ा बाजार रहा है। चाबहार बंदरगाह, जो पाकिस्तान को बायपास कर मध्य एशिया तक पहुँचने का भारत का मुख्य द्वार है, के संचालन में देरी भारत के भू-राजनीतिक प्रभाव को कमजोर कर सकती है, जिससे चीन और पाकिस्तान के क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ावा मिल सकता है।