यमुना की कायाकल्प के लिए 518 करोड़ का मेगा प्लान: डेढ़ साल में गंगा जैसी निर्मल दिखेगी दिल्ली की लाइफलाइन, केंद्र और राज्य मिलकर बढ़ाएंगे ई-फ्लो



नई दिल्ली: दिल्ली की जीवनदायिनी मानी जाने वाली यमुना नदी को प्रदूषण के कलंक से मुक्त करने के लिए एक ऐतिहासिक 'मेगा सफाई प्रोजेक्ट' को हरी झंडी मिल गई है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के साझा प्रयासों से अब यमुना को गंगा की तर्ज पर स्वच्छ बनाने के लिए 518.88 करोड़ रुपये का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य न केवल यमुना की सफाई करना है, बल्कि Coronation Pillar STP से शोधित (Treat) किए गए पानी को दोबारा नदी में छोड़कर उसके जलस्तर को बढ़ाना है। यह पूरा प्रोजेक्ट आगामी 18 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे वजीराबाद बैराज के पास नदी के पारिस्थितिक प्रवाह (E-flow) में सुधार होगा। The ambitious project focuses on reviving the Ecological Flow of the river by pumping 30 MGD of treated water back into the mainstream.

योजना के तकनीकी पहलुओं पर नजर डालें तो जहांगीरपुरी नाले से रोजाना लाखों लीटर गंदे पानी को पाइपलाइन के जरिए कोरोनेशन पिलर प्लांट तक लाया जाएगा। यहाँ पानी को पूरी तरह साफ करने के बाद ऊंचे आरसीसी चैनलों (Elevated Channels) और पंपिंग स्टेशनों के माध्यम से वापस यमुना में प्रवाहित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम के लिए 64 MLD और 318 MLD क्षमता के दो विशाल पंप हाउस बनाए जाएंगे। खास बात यह है कि इस प्रणाली में साफ पानी को खुले नालों के बजाय 'क्लोज डक्ट सिस्टम' से भेजा जाएगा ताकि वह दोबारा प्रदूषित न हो सके। This Bypass System ensures that the clean treated water reaches the river without getting re-contaminated by city drains.

इस परियोजना का वित्तीय भार राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के तहत केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि इसके रखरखाव की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की होगी। यमुना का वजीराबाद से ओखला तक का मात्र 22 किमी का हिस्सा सबसे अधिक प्रदूषित है, जो पूरी नदी के प्रदूषण का 76 फीसदी हिस्सा कवर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यमुना को जीवित रखने के लिए 23 क्यूमेक्स पानी की जरूरत है, जबकि वर्तमान में यह स्तर काफी कम है। हालांकि, यमुना कार्यकर्ताओं ने आगाह किया है कि नदी में छोड़े जाने वाले पानी की गुणवत्ता उच्च स्तर की होनी चाहिए ताकि जलीय जीवन सुरक्षित रह सके। The collaborative funding between the Central and State Governments marks a significant milestone in the mission to restore the glory of the Yamuna.



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