वैश्विक व्यापार में भूचाल: ईरान पर ट्रंप के '25% टैरिफ' के फरमान से चीन हुआ आगबबूला, भारत पर भी संकट के बादल



बीजिंग: ईरान में जारी आंतरिक अशांति और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी ने वैश्विक कूटनीति और व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। ट्रंप द्वारा ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर 25% 'दंडात्मक टैरिफ' लगाने के ऐलान पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने इसे "नाइंसाफी" और "लॉन्ग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन" (किसी दूसरे के अधिकार क्षेत्र में जबरन हस्तक्षेप) करार देते हुए कहा है कि वह किसी भी एकतरफा और अवैध प्रतिबंध का कड़ा विरोध करता है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने स्पष्ट किया कि चीन ईरान की राष्ट्रीय स्थिरता बनाए रखने का समर्थन करता है और अमेरिका को दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखल देना बंद करना चाहिए।

The situation escalated after Donald Trump's "decisive and final" order on Truth Social, which mandates a 25% tariff on any nation trading with the Islamic Republic of Iran. वाशिंगटन में चीनी दूतावास ने 'X' के जरिए चेतावनी दी कि "टैरिफ युद्ध में कोई विजेता नहीं होता" और चीन अपने वैध हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। यह आर्थिक तनाव केवल चीन तक सीमित नहीं है; ट्रंप के इस फरमान की आंच भारत तक भी पहुंचती दिख रही है। चूंकि अमेरिका ने भारत पर पहले ही 50% तक के टैरिफ लगाए हैं, ऐसे में ईरान के साथ व्यापार जारी रखने पर यह अतिरिक्त 25% का बोझ भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

As the White House considers cyber warfare and direct military options against Tehran, global markets are bracing for a massive supply chain disruption. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वाशिंगटन ने अपने नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने का निर्देश दिया है, जो युद्ध की आहट को और पुख्ता करता है। चीन ने इस 'टैरिफ युद्ध' को व्यापारिक जबरदस्ती बताते हुए कहा है कि दबाव से समस्याएं हल नहीं होतीं। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच इस ताजा टकराव ने मिडिल ईस्ट के संकट को एक वैश्विक व्यापार युद्ध में बदल दिया है, जिससे ऊर्जा की कीमतें और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति दोनों ही अस्थिर हो गए हैं।



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