हाथ मिले तो बात बनी: Apple ने मानी हार! अब Google के Gemini के सहारे स्मार्ट होगा Siri, 2026 के अंत तक दिखेगा 'सुपर-इंटेलिजेंट' अवतार



बेंगलुरु: दुनिया की दो सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी कंपनियां, Apple और Google, अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मोर्चे पर एक साथ आ गई हैं। Apple ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि वह अपने आगामी 'Apple Intelligence' और वर्चुअल असिस्टेंट Siri को अधिक शक्तिशाली और सटीक बनाने के लिए Google के Gemini AI मॉडल्स का उपयोग करेगा। यह फैसला तकनीकी जगत के लिए इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि Apple ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि जेनरेटिव AI की रेस में उसका अपना इन-हाउस मॉडल फिलहाल पिछड़ गया है। इस मल्टी-ईयर डील के तहत, Google का क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और Gemini की तकनीकी क्षमताएं Apple के फाउंडेशन मॉडल्स के लिए आधार का काम करेंगी, जिससे Siri को वह 'पर्सनल कॉन्टेक्स्ट' मिलेगा जिसकी कमी लंबे समय से खल रही थी।

The partnership is strategically crucial as Apple’s original plan to launch a fully revamped Siri in 2025 faced several technical hurdles, leading to an official delay. अब Google के Gemini के साथ मिलकर Apple अपने Siri को साल 2026 के अंत तक लॉन्च करने की तैयारी में है। हालांकि, Apple ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी 'प्राइवेसी-फर्स्ट' नीति से कोई समझौता नहीं करेगा। यूजर का डेटा या तो सीधे आईफोन पर प्रोसेस होगा या Apple के सुरक्षित 'प्राइवेट क्लाउड कंप्यूट' पर। Google को केवल तकनीकी लेयर प्रदान करने की अनुमति दी गई है; वह यूजर के डेटा का उपयोग विज्ञापनों या अपने स्वयं के AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए नहीं कर सकेगा। यह डील एक्सक्लूसिव नहीं है, जिसका अर्थ है कि Apple भविष्य में OpenAI (ChatGPT) जैसे अन्य पार्टनर्स के साथ भी सहयोग जारी रख सकता है।

This collaboration marks a significant shift in the Silicon Valley power dynamic, where rivals are turning into partners to keep pace with the rapidly evolving AI landscape. Apple को उम्मीद है कि Gemini की ताकत और उसके अपने बेहतरीन यूजर इंटरफेस का संगम Siri को पहले से कहीं ज्यादा नेचुरल, तेज और ऐप-कंट्रोलिंग में माहिर बना देगा। अगर यह 'प्लान-बी' सफल रहता है, तो आईफोन यूजर्स को आखिरकार वह स्मार्ट असिस्टेंट मिल पाएगा जो वास्तव में उनके बोलने के लहजे और जरूरतों को समझ सके। फिलहाल, Apple के डेवलपर्स Google के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर इन नए मॉडल्स को टेस्ट करने में जुटे हैं ताकि 2026 के लॉन्च को बिना किसी और देरी के सफल बनाया जा सके।



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