पाकिस्तान का JF-17 'सेल' अभियान: इंडोनेशिया के साथ 40 लड़ाकू विमानों की बड़ी डील की तैयारी, बांग्लादेश और सऊदी अरब पर भी नजर


इस्लामाबाद: चीन के सहयोग से निर्मित JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों को लेकर पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सक्रियता से ग्राहक तलाश रहा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा मार गिराए जाने के बाद इस विमान की साख पर उठे सवालों के बीच, पाकिस्तान इसे इंडोनेशिया को बेचने के लिए बड़े स्तर पर बातचीत कर रहा है। हाल ही में इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री सफरी शम्सुद्दीन और पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में 40 से अधिक JF-17 लड़ाकू विमानों और किलर ड्रोन्स की बिक्री पर विस्तृत चर्चा हुई है। यह कदम इंडोनेशिया की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वह अपनी पुरानी हो चुकी वायुसेना फ्लीट को आधुनिक विमानों से बदलना चाहता है।

The deal is currently in the pipeline, following Indonesian President Prabowo Subianto's recent visit to Pakistan aimed at strengthening bilateral defense ties. हालांकि इंडोनेशिया पहले से ही फ्रांस के साथ 42 राफेल विमानों और तुर्की के साथ 48 KAAN फाइटर जेट्स के लिए अरबों डॉलर के समझौते कर चुका है, लेकिन कम लागत वाले विकल्प के रूप में वह JF-17 पर भी विचार कर रहा है। पाकिस्तान की कोशिश है कि वह न केवल इंडोनेशिया, बल्कि बांग्लादेश, लीबिया और सूडान जैसे देशों को भी यह 'मल्टी-रोल फाइटर जेट' बेचकर अपना रक्षा निर्यात बढ़ा सके। विशेष रूप से बांग्लादेश के साथ 'मुशाक ट्रेनिंग जेट' और JF-17 की संभावित डील को लेकर पाकिस्तान के सैन्य गलियारों में काफी हलचल है।

Beyond Southeast Asia, Pakistan is reportedly engaged in discussions with Saudi Arabia for a massive defense contract worth 2 to 4 billion dollars. इस प्रस्तावित समझौते के तहत, पाकिस्तान सऊदी अरब से लिए गए कर्ज को चुकाने के बदले में सैन्य साजो-सामान (Military Supply) की आपूर्ति कर सकता है। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह 'डिफेंस एक्सपोर्ट पुश' उसकी डगमगाती अर्थव्यवस्था को सहारा देने और वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य तकनीक को स्थापित करने की एक हताशा भरी कोशिश है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय रक्षा प्रणाली के सामने नाकाम साबित हो चुके इन विमानों को इंडोनेशिया और सऊदी अरब जैसे देश अपनी सेना में किस हद तक जगह देते हैं।


Previous Post Next Post