विपक्ष की फूट से महायुति की बल्ले-बल्ले: मुंबई महानगरपालिका (BMC) की 32 सीटों पर सीधा असर, भाजपा को मिला सबसे बड़ा फायदा

 


मुंबई: मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के नतीजों के विस्तृत विश्लेषण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्षी दलों की आपसी फूट सत्ताधारी महायुति के लिए वरदान साबित हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) और कांग्रेस के बीच गठबंधन न होने के कारण कम से कम 32 वार्डों में विपक्षी वोटों का भारी विभाजन हुआ, जिसका सीधा लाभ भाजपा और एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना को मिला। Data released by the Maharashtra State Election Commission (SEC) shows that the split in opposition votes allowed the BJP to secure 21 wards, while Eknath Shinde's Shiv Sena won 10, and Ajit Pawar's NCP claimed one. यदि विपक्ष एकजुट होकर चुनाव लड़ता, तो इन सीटों पर नतीजे पूरी तरह से बदल सकते थे।

चुनाव पूर्व समीकरणों की बात करें तो उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस का साथ छोड़कर राज ठाकरे की मनसे (MNS) से हाथ मिलाया था, जबकि कांग्रेस ने प्रकाश अंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) के साथ चुनाव लड़ा। Analysis of Dahisar and Andheri West seats reveals that the victory margin of the Mahayuti candidates was much smaller than the combined votes received by the Shiv Sena (UBT) and Congress. उदाहरण के तौर पर, अंधेरी पश्चिम में भाजपा उम्मीदवार मात्र 538 वोटों से जीते, जबकि वहां कांग्रेस ने 4,380 और शिवसेना (UBT) ने 8,655 वोट हासिल किए थे। इसी तरह मानखुर्द और धारावी जैसे इलाकों में भी विपक्षी बिखराव के कारण महायुति की राह आसान हो गई।

इस चुनावी हार पर प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने गठबंधन टूटने के नुकसान पर चुप्पी साधे रखी और केवल इतना कहा कि राजनीति में 'अगर-मगर' की कोई जगह नहीं होती। However, the Congress camp remains critical of the decision, stating that Uddhav’s alliance with Raj Thackeray made it impossible for them to remain together in the Maha Vikas Aghadi. कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि स्वतंत्र चुनाव लड़ने का फैसला सही था, लेकिन एकजुटता के अभाव ने भाजपा को बढ़त दिला दी। अब इन नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में गठबंधन के नए समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।


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