नई दिल्ली: आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार शादीशुदा टैक्सपेयर्स के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव करने की तैयारी में है। वित्त मंत्रालय 'वैकल्पिक जॉइंट टैक्सेशन सिस्टम' (Optional Joint Taxation System) लाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है, जिसके तहत पति-पत्नी को मिलकर एक ही इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की सुविधा मिल सकती है। The Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) has proposed this family-centric model, highlighting that it would treat the household as a single economic unit, much like the systems in the USA and Germany. इस कदम का सबसे बड़ा लाभ उन मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा जहाँ केवल एक सदस्य कमाता है, क्योंकि वर्तमान में वे गैर-कमाने वाले जीवनसाथी की टैक्स छूट (Basic Exemption Limit) का लाभ नहीं उठा पाते हैं।
प्रस्तावित मॉडल के अनुसार, जॉइंट फाइलिंग चुनने वाले जोड़ों के लिए टैक्स स्लैब और छूट की सीमा अलग हो सकती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जहाँ वर्तमान में व्यक्तिगत छूट ₹4 लाख (नई व्यवस्था के तहत संभावित) है, वहीं जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा ₹6 लाख से ₹8 लाख तक बढ़ाई जा सकती है। Reports suggest a possible slab structure where combined income up to ₹8 lakh could be tax-free, with a 5% rate for income between ₹8 lakh and ₹16 lakh. इसके अलावा, होम लोन के ब्याज पर कटौती और मेडिकल इंश्योरेंस जैसे फायदों को भी दोनों की कुल आय में बेहतर तरीके से एडजस्ट किया जा सकेगा। यदि दोनों पति-पत्नी कामकाजी हैं, तो उन्हें अलग-अलग स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलता रहेगा, जिससे उनकी कर देयता में भारी कमी आएगी।
सिर्फ छूट ही नहीं, बल्कि अमीरों पर लगने वाले 'सरचार्ज' (Surcharge) के नियमों में भी राहत मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में ₹50 लाख से अधिक की व्यक्तिगत आय पर सरचार्ज लगता है, लेकिन जॉइंट फाइलिंग के मामले में इस सीमा को बढ़ाकर ₹75 लाख या उससे अधिक किया जा सकता है। This shift is seen as a major move to simplify tax compliance and recognize the economic contribution of homemakers by providing significant disposable income back to families. 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में यदि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस प्रस्ताव की घोषणा करती हैं, तो यह भारत के कर इतिहास में एक ऐतिहासिक और परिवार-हितैषी सुधार साबित होगा।