चंडीगढ़: चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर चुनाव में आज उस समय बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला जब नामांकन के अंतिम दिन आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच गठबंधन अचानक टूट गया। कुछ दिन पहले तक दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ने और बीजेपी को हराने का जो दावा किया था, वह अब पूरी तरह बिखर गया है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह किसी भी समझौते के बिना तीनों प्रमुख पदों—मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर—पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। कांग्रेस के इस फैसले के बाद अब मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है, जिससे भाजपा की राह काफी आसान मानी जा रही है। The split between the alliance partners at the eleventh hour has dramatically shifted the numerical advantage in favor of the BJP.
आम आदमी पार्टी ने अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करते हुए योगेश ढींगरा को मेयर, मुन्नवर ख़ान को सीनियर डिप्टी मेयर और जसविंदर कौर को डिप्टी मेयर पद के लिए मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस की ओर से गुरप्रीत गाबी मेयर पद के लिए, सचिन गालव सीनियर डिप्टी मेयर और निर्मला देवी डिप्टी मेयर पद के लिए ताल ठोकेंगे। 'आप' नेता अनुराग ढांडा ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा देश को लूटा है और उनके साथ गठबंधन का सवाल ही नहीं उठता। यह बयान उन अटकलों पर विराम लगाने के लिए काफी है जो पिछले कुछ दिनों से एक साझा 'इंडिया गठबंधन' की जीत की उम्मीद जगा रही थीं। The aggressive rhetoric from AAP highlights the deepening rift within the local opposition leadership.
समीकरणों की बात करें तो 35 पार्षदों वाले सदन में बहुमत के लिए 18 वोटों की आवश्यकता है (सांसद के वोट को मिलाकर कुल 36 वोट)। वर्तमान में भाजपा के पास सांसद मनीष तिवारी (कांग्रेस) के एक वोट के बावजूद 18 पार्षदों का मजबूत समर्थन है, क्योंकि हाल के महीनों में 'आप' और कांग्रेस के कई पार्षद दल बदलकर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी के पास अब केवल 11 और कांग्रेस के पास 6 पार्षद बचे हैं। इस बीच 'आप' के एक और पार्षद के लापता होने की खबरों ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है। 29 जनवरी को होने वाले इस चुनाव में इस बार 'सीक्रेट बैलेट' के बजाय हाथ उठाकर मतदान होगा, जिससे क्रॉस वोटिंग की संभावना कम होगी लेकिन गठबंधन के अभाव में भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। The new voting format of showing hands is expected to bring transparency but also cement the numerical lead held by the ruling party.