नई दिल्ली: दिल्ली और उत्तराखंड के बीच की दूरी अब सिमटने वाली है। 11,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 213 किलोमीटर लंबा दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में ट्रैफिक के लिए पूरी तरह खुल सकता है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के अनुसार, इस कॉरिडोर का 99% से अधिक काम पूरा हो चुका है और वर्तमान में केवल फिनिशिंग व पिट-स्टॉप (चाय, पानी और टॉयलेट की सुविधा) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून तक की यात्रा का समय 6 घंटे से घटकर मात्र 2.5 से 3 घंटे रह जाएगा, जो यात्रियों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित होगा।
The expressway has been constructed in four strategic phases, connecting Akshardham in Delhi to Dehradun via Uttar Pradesh. पहले चरण में अक्षरधाम से लोनी तक का हिस्सा शामिल है, जबकि दूसरे और तीसरे चरण में बागपत, सहारनपुर और गणेशपुर को जोड़ा गया है। सबसे चुनौतीपूर्ण चौथा चरण (20 किमी) गणेशपुर से देहरादून के बीच का है, जिसमें वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर और सुरंगे बनाई गई हैं। मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे पर इंटरचेंज का मामूली काम अगले 10 दिनों में पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद सुरक्षा ऑडिट कर इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
Regarding travel costs and rules, NHAI has set the maximum speed limit for cars at 100 kmph, while buses and trucks can travel at a maximum speed of 80 kmph. पूरे रूट पर चार टोल प्लाजा बनाए गए हैं। सामान्य यात्रियों के लिए एक तरफ का टोल चार्ज लगभग 500 रुपये होगा, लेकिन फास्टैग सालाना पास धारकों के लिए यह यात्रा मात्र 60 रुपये प्रति ट्रिप (एक साइड) में संभव होगी। यह कॉरिडोर न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के औद्योगिक विकास को भी नई गति प्रदान करेगा।