नई दिल्ली/गुरुग्राम: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए गुरुग्राम के पॉश इलाके डीएलएफ सिटी फेज-5 स्थित 'द मैगनोलियास' में एक आलीशान अपार्टमेंट को कुर्क कर लिया है। करीब 32.28 करोड़ रुपये मूल्य की यह संपत्ति एम/एस अनवी पॉवर इनवेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर पंजीकृत है। ईडी की जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए जेनसोल ग्रुप के चेयरमैन अनमोल सिंह जग्गी ने सरकारी अनुदान के उस पैसे का इस्तेमाल किया, जो भारत के महत्वाकांक्षी 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के तहत पायलट प्रोजेक्ट के लिए आवंटित किया गया था।
मामले की जड़ें सीबीआई द्वारा दर्ज उस प्राथमिकी से जुड़ी हैं, जो सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई 'मेकॉन लिमिटेड' की शिकायत पर आधारित थी। जांच के अनुसार, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने इस्पात क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सरकारी फंड जारी किया था। इस योजना के तहत एम/एस मैट्रिक्स गैस एंड रिन्यूवेबल्स लिमिटेड सफल बोलीदाता के रूप में चुनी गई थी और उसे परियोजना शुरू करने के लिए पहली किस्त के रूप में ₹32.28 करोड़ का सरकारी अनुदान दिया गया था। बजाय इस सार्वजनिक धन को पायलट प्रोजेक्ट पर खर्च करने के, कंपनी ने कथित तौर पर धोखाधड़ी करते हुए इस पूरी राशि को अनमोल सिंह जग्गी के नियंत्रण वाली कई शेल कंपनियों के जाल के माध्यम से डायवर्ट कर दिया।
ईडी की जांच में पाया गया कि इस फंड को लेयरिंग (लेन-देन की लंबी श्रृंखला) के जरिए घुमाया गया ताकि इसके वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके। अंततः इस पैसे का इस्तेमाल जेनसोल ग्रुप के प्रमोटरों के व्यक्तिगत लाभ और गुरुग्राम में लग्जरी रियल एस्टेट खरीदने के लिए किया गया। ईडी ने इस राशि को 'अपराध की आय' (Proceeds of Crime) मानते हुए प्रॉपर्टी को प्रोविजनल रूप से अटैच कर लिया है। इस मामले ने सरकारी योजनाओं में मिलने वाले अनुदान के दुरुपयोग और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।