पटरी पर आस्था का अद्भुत संगम: बिहार से दक्षिण भारत चली 'भारत गौरव' ट्रेन, कोच के भीतर विराजे गणपति बप्पा


नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की 'भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन' इन दिनों अपनी एक अनोखी विशेषता के कारण देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। बिहार के सुगौली से दक्षिण भारत की तीर्थयात्रा पर निकली इस विशेष ट्रेन के एक स्लीपर कोच को चलते-फिरते मंदिर का स्वरूप दे दिया गया है। कोच की एक साइड अपर सीट पर भगवान गणेश की प्रतिमा विधिवत रूप से स्थापित की गई है, जहाँ यात्री पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर रहे हैं। 18 जनवरी से शुरू हुई यह 15 दिवसीय यात्रा श्रद्धालुओं के लिए केवल एक सफर नहीं, बल्कि भक्ति का एक जीवंत अनुभव बन गई है। भगवान की उपस्थिति के कारण यात्री खुद को सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं। The innovative integration of a devotional space within the train coach has transformed the long-distance journey into a continuous spiritual retreat for the pilgrims.

ट्रेन के भीतर का नजारा किसी मंदिर परिसर जैसा प्रतीत होता है। यात्रा के दौरान सुबह और शाम सामूहिक आरती का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु ढोलक और झाल की थाप पर भजन-कीर्तन करते हैं। कोच को फूलों और धार्मिक झंडों से सजाया गया है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। सुगौली से रवाना हुई इस ट्रेन में बिहार के विभिन्न जिलों के लगभग 464 यात्री सवार हैं, जिनमें अधिकांश बुजुर्ग शामिल हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि ट्रेन में मंदिर होने से उन्हें घर जैसा अहसास हो रहा है और लंबी यात्रा की थकान का अनुभव नहीं हो रहा है। The rhythmic chanting and traditional music echoing through the moving train create a unique atmosphere of communal worship and joy.

यह विशेष यात्रा 1 फरवरी तक जारी रहेगी, जिसमें यात्रियों को तिरुपति बालाजी, रामेश्वरम, मीनाक्षी मंदिर, कन्याकुमारी, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और जगन्नाथ पुरी जैसे प्रमुख धामों के दर्शन कराए जा रहे हैं। आईआरसीटीसी (IRCTC) द्वारा संचालित इस पैकेज में यात्रियों के रहने, शाकाहारी भोजन और स्थानीय भ्रमण की पूरी व्यवस्था शामिल है। स्लीपर क्लास के लिए प्रति व्यक्ति किराया 27,535 रुपये रखा गया है, जबकि एसी श्रेणियों के लिए अलग शुल्क निर्धारित हैं। सुरक्षा और बीमा की सुविधाओं के साथ यह ट्रेन केवल उन यात्रियों के लिए है जिन्होंने अग्रिम बुकिंग कराई है, जिससे तीर्थयात्रियों को एक सुरक्षित और निजी माहौल मिल पा रहा है। This all-inclusive pilgrimage model continues to gain popularity for its focus on comfort, safety, and cultural resonance.



Previous Post Next Post