गहोई समाज की अनूठी पहल: अब सात नहीं आठ फेरों से संपन्न होंगी शादियां, बेटियों के संरक्षण के लिए लिया गया 'आठवां वचन'



छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर में गहोई समाज ने अपनी समृद्ध परंपराओं में एक क्रांतिकारी बदलाव करते हुए विवाह के सात वचनों के साथ एक नया अध्याय जोड़ दिया है। अब इस समाज में होने वाली शादियां सात नहीं बल्कि आठ फेरों और वचनों के साथ संपन्न होंगी। इस नई परंपरा का मुख्य उद्देश्य समाज में लगातार घट रही लड़कियों की संख्या को रोकना और 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के संदेश को घर-घर तक पहुंचाना है। The community introduced this historic change during the 'Gahoi Diwas' celebrations, where a mass marriage ceremony saw couples taking an extra eighth vow specifically dedicated to the education and protection of the girl child.

समाज के इस वार्षिक आयोजन में निकाली गई भव्य शोभायात्रा के बाद आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में चार जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। विवाह संपन्न कराने वाले पंडित सौरभ तिवारी ने बताया कि हालांकि हिंदू धर्म में सात वचनों का विधान है, लेकिन समाज की गिरती लिंगानुपात दर को देखते हुए भ्रूण हत्या रोकने और महिला सशक्तिकरण के लिए यह आठवां वचन जोड़ा गया है। Newlyweds Satyam and Dolly expressed their pride in being part of this initiative, stating that this vow would create awareness against female feticide and encourage families to treat daughters with equal respect and provide them with quality education.

गहोई समाज के सचिव राजेश रूसिया ने इस बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज में लड़कियों की घटती संख्या एक गंभीर चिंता का विषय बन गई थी, जिससे निपटने के लिए वैवाहिक मंच को सबसे प्रभावी माध्यम माना गया। शोभायात्रा के दौरान समाज के युवाओं और महिलाओं ने भी इस पहल का जोरदार स्वागत किया और पूरे शहर में इसकी सराहना हो रही है। The community leaders believe that when a couple starts their new life with a commitment to protecting future generations of girls, it will have a lasting cultural impact on the entire Bundelkhand region.


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