Grok AI का बड़ा ब्लंडर: पीएम मोदी के धन्यवाद संदेश का किया विवादित अनुवाद, दोस्ती के पैगाम को 'भारत विरोधी' प्रोपेगेंडा में बदला



नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू द्वारा भेजे गए बधाई संदेश का जवाब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मालदीव की स्थानीय 'धिवेही' भाषा में दिया, तो एलन मस्क के एआई प्लेटफॉर्म 'ग्रोक' (Grok) ने इसका बेहद आपत्तिजनक और गलत अनुवाद पेश कर दिया। ग्रोक ने पीएम मोदी के सौहार्दपूर्ण संदेश को पूरी तरह तोड़-मरोड़कर इसे 'भारत विरोधी अभियानों' से जोड़ दिया, जिससे सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। This massive Translation Blunder by Grok AI turned a diplomatic gesture into a controversial statement, highlighting the risks of over-reliance on unverified AI tools.

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मुइज्जू को धिवेही भाषा में 'शुक्रिया' कहा था। ग्रोक एआई ने इस सरल संदेश का अनुवाद करते हुए इसमें अपनी तरफ से यह जोड़ दिया कि मालदीव की सरकार भारत विरोधी अभियानों में शामिल रही है और विरोध प्रदर्शनों में सबसे आगे रही है। हैरानी की बात यह है कि मूल संदेश में ऐसा कोई जिक्र नहीं था। सोशल मीडिया यूजर्स ने ग्रोक की इस हरकत को 'खतरनाक प्रोपेगेंडा' और 'डेटा मैनिपुलेशन' करार दिया है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख ग्रोक ने बाद में अपनी गलती सुधारी और अब वह संदेश का सही अनुवाद दिखा रहा है, जिसमें दोनों देशों के समृद्ध भविष्य की कामना की गई है। The AI-Generated Misinformation briefly spiked diplomatic tensions on digital platforms before being corrected by the system.

यह घटना इसलिए भी अधिक संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ समय में भारत और मालदीव के रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव आए हैं। राष्ट्रपति मुइज्जू ने अपने चुनावी अभियान के दौरान 'इंडिया आउट' का नारा दिया था, लेकिन हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार देखा गया है। ऐसे में एआई द्वारा इस तरह की 'हैलुसिनेशन' (भ्रामक जानकारी देना) न केवल दो देशों के रिश्तों को प्रभावित कर सकती है, बल्कि सोशल मीडिया पर भ्रम भी फैला सकती है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रोक जैसे एआई मॉडल अक्सर इंटरनेट पर मौजूद पुराने डेटा और प्रोपेगेंडा के आधार पर गलत निष्कर्ष निकाल लेते हैं। This incident serves as a Stark Reminder of how AI hallucinations can jeopardize sensitive international relations and fuel digital misinformation.


Previous Post Next Post