चंडीगढ़: हरियाणा परिवहन विभाग ने राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित और आधुनिक बनाने की दिशा में दो बड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। शनिवार, 17 जनवरी 2026 को जारी नए आदेशों के अनुसार, अब हरियाणा रोडवेज की बसों के चालकों के लिए गाड़ी चलाते समय सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों पर न केवल 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उन पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। परिवहन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी बस में सीट बेल्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो इसके लिए संबंधित डिपो के वर्कशॉप मैनेजर को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन्हीं से जुर्माना वसूला जाएगा। इस आदेश के बाद सभी डिपो की वर्कशॉप में पुरानी और नई बसों में सीट बेल्ट लगाने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।
The move aims to enhance the safety of both passengers and drivers while strictly adhering to road safety standards across the state. सड़क सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करने के साथ-साथ हरियाणा सरकार प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल परिवहन (Green Transport) को भी बढ़ावा दे रही है। परिवहन विभाग ने घोषणा की है कि जल्द ही रोडवेज के बेड़े में 500 नई इलेक्ट्रिक बसें (E-Buses) शामिल की जाएंगी। इन बसों के संचालन के लिए बुनियादी ढांचा लगभग तैयार है और मार्च 2026 के अंत तक विभिन्न डिपो से इन बसों का नियमित परिचालन शुरू करने की योजना है। ऊर्जा विभाग को प्रदेश में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क स्थापित करने के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो निजी क्षेत्र के साथ मिलकर विभिन्न रूटों पर चार्जिंग पॉइंट विकसित कर रहा है।
The government's dual strategy of enforcing seat belt discipline and transitioning to electric mobility is expected to reduce road accidents and carbon emissions significantly. अधिकारियों के अनुसार, इलेक्ट्रिक बसों के आगमन से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि यात्रियों को एक प्रीमियम और आरामदायक सफर का अनुभव भी मिलेगा। परिवहन विभाग के महानिदेशक ने सभी महाप्रबंधकों को आदेश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि सड़क पर उतरने वाली हर बस सुरक्षा मानकों पर खरी उतरे। इस पहल से निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने और सार्वजनिक परिवहन को अधिक आकर्षक बनाने का लक्ष्य रखा गया है। आने वाले महीनों में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में और बढ़ोतरी की जाएगी ताकि लंबी दूरी के रूटों पर भी इलेक्ट्रिक बसों को बिना किसी बाधा के चलाया जा सके।