हरियाणा के स्कूलों की 'सेहत रिपोर्ट' में चौंकाने वाला खुलासा: सरकारी से ज्यादा निजी स्कूलों के बच्चे एनीमिया के शिकार, 10 जिलों में 53 प्रतिशत तक खून की कमी



हिसार: हरियाणा के स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है, जिसने अभिभावकों और स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। स्कूल हेल्थ विभाग द्वारा प्रदेश के 10 प्रमुख जिलों में की गई जांच में यह तथ्य सामने आया है कि सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों (Private Schools) में पढ़ रहे बच्चे शारीरिक रूप से अधिक असुरक्षित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 10 से 19 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों के हीमोग्लोबिन स्तर की जांच की गई, जिसमें पाया गया कि संपन्न घरों से आने वाले निजी स्कूलों के बच्चों में 'एनीमिया' यानी खून की कमी की समस्या अधिक गंभीर है। इस रिपोर्ट ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि बेहतर खान-पान केवल निजी स्कूलों के बच्चों तक ही सीमित है।

The health survey categorized the districts into two groups—Group A (Ambala, Karnal, Panipat, Panchkula, Yamunanagar) and Group B (Faridabad, Gurugram, Jhajjar, Rohtak, Sonipat). ग्रुप-ए के जिलों में सरकारी स्कूलों के 46 प्रतिशत बच्चों के मुकाबले निजी स्कूलों के 49 प्रतिशत बच्चों में खून की कमी पाई गई। वहीं, ग्रुप-बी (जिसमें दिल्ली से सटे हाई-प्रोफाइल जिले शामिल हैं) की स्थिति और भी विकट है; यहाँ सरकारी स्कूलों में 50 प्रतिशत, जबकि निजी स्कूलों के 53.6 प्रतिशत विद्यार्थियों में हीमोग्लोबिन की कमी दर्ज की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि निजी स्कूलों के बच्चों में बढ़ता जंक फूड का चलन और पोषक तत्वों की कमी इस भयावह रिपोर्ट का मुख्य कारण हो सकती है।

| जिला समूह | सरकारी स्कूल (खून की कमी) | निजी स्कूल (खून की कमी) |

|---|---|---|

| ग्रुप-ए (अंबाला, करनाल, आदि) | 46% | 49% |

| ग्रुप-बी (गुरुग्राम, फरीदाबाद, आदि) | 50% | 53.6% |

The findings have prompted health officials to reconsider nutritional interventions, which were previously focused primarily on government-run institutions. रिपोर्ट उजागर होने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग इन सभी 10 जिलों के निजी स्कूलों में भी विशेष स्वास्थ्य शिविर और 'आयरन-फॉलिक एसिड' की गोलियां वितरित करने की योजना बना रहा है। डॉक्टरों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बच्चों के आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, गुड़ और आयरन युक्त भोजन शामिल करें, ताकि किशोर अवस्था में बढ़ती शारीरिक जरूरतों को पूरा किया जा सके। विभाग अब इस डेटा के आधार पर प्रत्येक जिले के लिए एक कस्टमाइज्ड 'हेल्थ एक्शन प्लान' तैयार करने की तैयारी में है।


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