हिमाचल में स्वरोजगार की नई राह: राजीव गांधी स्टार्टअप योजना के तहत 390 रूटों पर परमिट जारी करेगा परिवहन विभाग, युवाओं को मिलेगी 30% सब्सिडी



शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने और बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए 'राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना' के तहत एक बड़ी पहल की है। परिवहन विभाग ने प्रदेश के 12 जिलों में कुल 390 नए बस रूटों पर परमिट जारी करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस योजना के तहत 18 से 42 सीटर बस खरीदने वाले पात्र युवाओं को सरकार की ओर से बस की ऑन-रोड कीमत पर 30 प्रतिशत की सीधी सब्सिडी दी जाएगी। इच्छुक युवा विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर 8 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

विभाग द्वारा जारी रूटों की सूची में जिला कांगड़ा को सबसे अधिक 101 रूट आवंटित किए गए हैं, जबकि मंडी में 95 और राजधानी शिमला में 68 रूटों पर निजी बसों के संचालन की अनुमति दी जाएगी। अन्य जिलों में कुल्लू को 20, बिलासपुर को 19, हमीरपुर को 18, नाहन को 15, रामपुर को 14, ऊना को 13, चम्बा को 11, बद्दी-नालागढ़ को 9 और सोलन को 7 रूट मिले हैं। सरकार की इस योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्गम ग्रामीण इलाकों में बस कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है।

परिवहन विभाग द्वारा जारी एसओपी (SOP) के अनुसार, आवेदन करने वाला व्यक्ति बोनाफाइड हिमाचली और बेरोजगार होना अनिवार्य है। योजना की शर्तों के मुताबिक, एक परिवार से केवल एक ही सदस्य इस लाभ का पात्र होगा और आवेदक का सरकारी या अर्ध-सरकारी क्षेत्र में कार्यरत न होना आवश्यक है। आवेदनों की जांच क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (RTO) द्वारा की जाएगी और यदि आवेदकों की संख्या उपलब्ध रूटों से अधिक होती है, तो चयन लॉटरी या 'ड्रॉ ऑफ लॉट्स' के माध्यम से किया जाएगा। सब्सिडी की राशि वाहन खरीद और परमिट जारी होने के बाद सीधे बैंक के माध्यम से प्रदान की जाएगी।

योजना को लेकर सरकार ने कड़े नियम भी बनाए हैं, जिसके तहत आवंटित परमिट गैर-हस्तांतरणीय होंगे, यानी इन्हें किसी दूसरे को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा। लाभार्थी को आवंटित मार्ग पर बस का नियमित संचालन सुनिश्चित करना होगा और शर्तों के उल्लंघन या दुरुपयोग की स्थिति में परमिट रद्द कर दी जाएगी तथा दी गई सब्सिडी की वसूली भी की जाएगी। चयन प्रक्रिया में स्थानीय उपमंडल के निवासियों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि संबंधित क्षेत्र के युवाओं को ही इसका वास्तविक लाभ मिल सके।



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