नई दिल्ली : भारतीय रेलवे ने अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों को दिए जाने वाले विदाई उपहार को लेकर एक युगांतरकारी निर्णय लिया है। रेलवे बोर्ड ने रिटायरमेंट के अवसर पर gold-plated silver medal देने की 20 साल पुरानी परंपरा को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। बोर्ड की प्रधान कार्यकारी निदेशक रेनू शर्मा द्वारा जारी औपचारिक आदेश के अनुसार, अब किसी भी रेलकर्मी को विदाई के समय सोने की परत वाला चांदी का सिक्का नहीं दिया जाएगा। यह नया नियम 31 जनवरी 2026 को रिटायर होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी लागू होगा।
इस ऐतिहासिक परंपरा को खत्म करने के पीछे भोपाल मंडल में सामने आया एक बड़ा medal scam मुख्य वजह माना जा रहा है। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि रिटायर होने वाले कर्मचारियों को जो मेडल दिए जा रहे थे, वे असल में नकली थे। लैब टेस्टिंग में पाया गया कि उन सिक्कों में चांदी की मात्रा महज 0.23 percent थी, जबकि उन्हें 20 ग्राम चांदी का बताकर वितरित किया गया था। इस fake coin scandal के बाद रेलवे की काफी किरकिरी हुई थी, जिसके चलते प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया को ही बंद करने का फैसला किया है।
रेलवे ने साल 2006 में इस प्रथा की शुरुआत की थी ताकि कर्मचारियों की दशकों की सेवा को honor and respect दिया जा सके। हालांकि, भ्रष्टाचार और सप्लायरों की धोखाधड़ी के कारण अब रेलवे ने संबंधित सप्लायर के खिलाफ FIR and blacklisting की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में मौजूद मेडल स्टॉक का उपयोग अब विदाई समारोहों में नहीं किया जाएगा, बल्कि उन्हें अन्य प्रशासनिक कार्यों में खपाया जाएगा। इस बदलाव के बाद अब रेलवे कर्मचारी संगठनों के बीच विदाई उपहार के नए स्वरूप को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।