तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान के सरकारी टेलीविजन (IRINN) पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सरेआम जान से मारने की धमकी दी गई है। एक विशेष प्रसारण के दौरान ट्रंप की 2024 की पेंसिल्वेनिया रैली में हुए जानलेवा हमले की तस्वीर दिखाई गई, जिसमें वे खून से लथपथ नजर आ रहे थे। इस तस्वीर के नीचे फारसी भाषा में एक डरावना संदेश लिखा था: "इस बार निशाना नहीं चूकेगा और गोली सिर के आर-पार होगी।" यह धमकी ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों और उसमें ट्रंप द्वारा दी गई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के जवाब में देखी जा रही है। तेहरान में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान समर्थकों ने 'अमेरिका मुर्दाबाद' के नारे लगाए और ट्रंप के खिलाफ इसी तरह के पोस्टर लहराए।
The explicit threat has put U.S. intelligence agencies on high alert, especially following Trump's recent support for anti-regime protesters in Iran. ईरान के सरकारी चैनल ने जानबूझकर उस घटना का उल्लेख किया जब थॉमस क्रूक्स ने बटलर में ट्रंप पर फायरिंग की थी, जिसमें गोली उनके कान को छूकर निकल गई थी। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जबकि ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार नहीं रोका, तो अमेरिका जोरदार सैन्य जवाब देगा। यह पहली बार नहीं है जब ईरान ने ट्रंप को निशाना बनाने की बात कही है; 2020 में जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद से ही ईरान लगातार बदला लेने की कसम खाता रहा है। अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में ईरान द्वारा समर्थित कई ऐसी साजिशों को नाकाम करने का दावा भी किया है।
The Secret Service has confirmed it is aware of these latest threats and is taking all necessary precautions for the President's safety. ईरान में जारी अस्थिरता के बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर 'मदद रास्ते में है' (Help is on the way) का संदेश देकर प्रदर्शनकारियों का मनोबल बढ़ाया है, जिससे ईरानी नेतृत्व भड़का हुआ है। तेहरान में हाल ही में 100 से अधिक सुरक्षाकर्मियों के अंतिम संस्कार के दौरान सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थकों ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध जैसा माहौल बना दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सीधी धमकियां दोनों परमाणु-सक्षम शक्तियों के बीच सीधे सैन्य टकराव की आशंका को और बढ़ा सकती हैं। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए है क्योंकि मिडिल ईस्ट में अशांति का खतरा गहराता जा रहा है।