इराक से अमेरिकी सेना की पूर्ण विदाई: ऐन अल-असद एयर बेस पर अब इराकी फौज का कब्जा, खत्म हुआ विदेशी सैन्य मिशन

 


इराक: इराकी रक्षा अधिकारियों ने शनिवार को आधिकारिक पुष्टि की है कि पश्चिमी इराक में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'ऐन अल-असद' एयर बेस से अमेरिकी बलों की पूरी तरह वापसी हो गई है। यह ऐतिहासिक कदम वाशिंगटन और बगदाद के बीच 2024 में हुए उस समझौते का अंतिम चरण है, जिसके तहत इस्लामिक स्टेट (आईएस) के खिलाफ गठित अंतरराष्ट्रीय गठबंधन सेना को चरणबद्ध तरीके से देश छोड़ना था। The transition marks a pivotal moment for Iraqi sovereignty as the national army has officially taken over all security operations at the base, effectively ending years of direct American military presence in the western region. हालांकि, सीरिया में बदलते घटनाक्रमों के कारण इस वापसी में कुछ महीनों की देरी हुई थी, लेकिन अब अंतिम टुकड़ी ने भी बेस खाली कर दिया है।

इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी के अनुसार, सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनजर लगभग 250 से 350 अमेरिकी कर्मियों को अस्थायी रूप से वहां रोका गया था, जो अब समझौते के तहत वापस लौट चुके हैं। अमेरिकी बलों की विदाई के तुरंत बाद, इराकी थलसेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अब्दुल अमीर राशिद याराल्लाह ने एयर बेस का दौरा किया और विभिन्न सैन्य इकाइयों को नई रणनीतिक जिम्मेदारियां सौंपीं। This move is seen as a major test for the Iraqi security forces' ability to maintain stability and prevent the resurgence of terror networks without direct foreign ground support. रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एयर बेस के सभी तकनीकी और सुरक्षा विभाग अब पूरी तरह से इराकी कमान के अधीन हैं।

मध्य-पूर्व के सुरक्षा समीकरणों के लिहाज से यह एक बड़ा बदलाव है, हालांकि अमेरिकी सेना ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक वैश्विक बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों का कहना है कि इराक के पश्चिमी हिस्से से हटने के बावजूद, अमेरिकी बल उत्तरी इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्द क्षेत्रों और पड़ोसी सीरिया में अपनी मौजूदगी बनाए रखेंगे ताकि क्षेत्रीय स्थिरता पर नजर रखी जा सके। The Iraqi government plans to utilize the Ain al-Asad base as a central hub for its air defense and counter-terrorism operations in the desert regions. इस वापसी को इराक में एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां देश अपनी रक्षा के लिए स्वयं जिम्मेदार होगा।



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