लंदन: 'रिफॉर्म यूके' की ओर से लंदन के मेयर पद की उम्मीदवार लैला कनिंघम ने बुर्के और मुस्लिम समुदाय को लेकर दिए गए अपने बयानों से एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान कनिंघम ने कहा कि लंदन के कुछ हिस्से अब ब्रिटिश नहीं बल्कि 'मुस्लिम शहरों' जैसे नजर आते हैं। Laila Cunningham suggested that police should use the wearing of a burqa as a valid reason for 'stop and search' operations, arguing that covering one's face has no place in an open society. उन्होंने दावा किया कि जो लोग अपना चेहरा छिपाते हैं, उनके पीछे कोई न कोई आपराधिक मंशा हो सकती है, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से उनकी जांच अनिवार्य होनी चाहिए।
लैला कनिंघम, जो पहले सीपीएस प्रॉसिक्यूटर रह चुकी हैं, ने पिछले साल ही नाइजल फराज की पार्टी में शामिल होने के लिए अपने पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने तर्क दिया कि बुर्का पहनना कोई धार्मिक अनिवार्यता नहीं है बल्कि एक 'थोपी गई परंपरा' है और कई मुस्लिम देशों में भी इस पर प्रतिबंध लगा हुआ है। She stated that if she had the power, she would implement a total ban on face coverings in public to preserve the city's British identity. कनिंघम ने कहा कि वह लंदन में 'यहूदी-ईसाई' (Judeo-Christian) संस्कृति और ब्रिटिश परंपराओं को अधिक प्रमुखता से देखना चाहती हैं, जैसे ईस्टर के मौके पर पूरे शहर में बड़े स्तर पर आयोजन करना।
इस बयान के बाद मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी नेताओं ने उनकी कड़ी आलोचना की है, इसे समाज को बांटने वाला और भड़काऊ बताया है। Despite the backlash, Cunningham remains firm on her stance, emphasizing that London must remain a British city and not lose its cultural roots. वह आगामी चुनावों में रिफॉर्म पार्टी को लंदन काउंसिल में पहली बार नियंत्रण दिलाने के लिए प्रचार कर रही हैं। कनिंघम का मानना है कि चेहरा ढंकने की अनुमति देने से सुरक्षा चुनौतियां बढ़ती हैं और यह खुले लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।