सिंगापुर/एडिलेड: वैवाहिक विवादों और आपराधिक कृत्यों के चलते विदेश में रह रहे भारतीय मूल के दो पतियों के मामले इन दिनों अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। सिंगापुर की एक फैमिली कोर्ट ने कनाडाई नागरिकता प्राप्त भारतीय मूल के एक व्यक्ति को फटकार लगाते हुए उसकी अलग रह रही पत्नी और चार बच्चों को 6.34 लाख सिंगापुर डॉलर (लगभग 4 करोड़ रुपये से अधिक) का बकाया गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। आरोपी ने पत्नी को भरण-पोषण देने से बचने के लिए अक्टूबर 2023 में अपनी 6 करोड़ रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी थी और देश छोड़कर कनाडा भाग गया था। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर उच्च वेतन वाली नौकरी छोड़कर अपनी पारिवारिक और कानूनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकता। The court's decision reinforces the principle that earning capacity, rather than just current income, is the primary factor in determining alimony, especially when an individual attempts to evade financial obligations through strategic resignation.
दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड से एक और चौंकाने वाली कानूनी दलील सामने आई है। यहाँ अपनी पत्नी सुप्रिया ठाकुर की हत्या के आरोपी विक्रांत ठाकुर ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में दावा किया कि उसने अपनी पत्नी को 'मारा' जरूर है, लेकिन यह 'कत्ल' (मर्डर) नहीं है। विक्रांत का तर्क है कि यह घटना उत्तेजना के क्षण में हुई थी, इसलिए इसे 'गैर-इरादतन हत्या' (Manslaughter) की श्रेणी में रखा जाना चाहिए, न कि सुनियोजित मर्डर की श्रेणी में। आरोपी ने यह दलील अपनी संभावित सजा को कम कराने के उद्देश्य से दी है। सुप्रिया ठाकुर, जो पेशे से एक सम्मानित नर्स थीं, पिछले साल दिसंबर में अपने घर में अचेत अवस्था में पाई गई थीं। उनकी मृत्यु के बाद अब उनके दोस्तों ने उनके इकलौते बेटे के भविष्य के लिए एक चैरिटी फंड भी शुरू किया है। The legal distinction between murder and manslaughter has become the focal point of this high-profile trial, as the Indian community in Australia closely monitors the proceedings seeking justice for the deceased nurse.
ये दोनों ही मामले दर्शाते हैं कि घरेलू हिंसा और वैवाहिक अलगाव के मामलों में विदेशी अदालतें अब अत्यंत सख्त रुख अपना रही हैं। सिंगापुर के मामले में कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी बरकरार रखा है, वहीं ऑस्ट्रेलिया में विक्रांत के खिलाफ डीएनए और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद अप्रैल में अगली सुनवाई होगी। इन घटनाओं ने प्रवासी भारतीयों के बीच पारिवारिक विवादों के कानूनी और सामाजिक परिणामों पर एक नई बहस छेड़ दी है। While the Singapore court focused on economic justice for the family, the Adelaide legal system is grappling with the complexities of criminal intent in a tragic domestic fatality.