गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति और 'स्व' की पहचान: PMO अब हुआ ‘सेवा तीर्थ’, राजपथ से लेकर IPC तक मोदी सरकार ने बदले ये ऐतिहासिक नाम



नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने देश की प्रशासनिक और सांस्कृतिक पहचान को नया रूप देते हुए कई ऐतिहासिक बदलाव किए हैं। इसी कड़ी में सबसे ताजा और महत्वपूर्ण बदलाव प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और उसके नए प्रशासनिक ब्लॉक का नामकरण है, जिसे अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से जाना जाएगा। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत निर्मित इस 'एग्जीक्यूटिव एनक्लेव' में पीएमओ के साथ-साथ कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय भी स्थित होंगे। सरकार का तर्क है कि यह बदलाव केवल नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन में 'सत्ता' के बजाय 'सेवा की भावना' को सर्वोपरि रखने का एक प्रतीकात्मक संदेश है।

The transformation of iconic landmarks like 'Rajpath' into 'Kartavya Path' and '7 Race Course Road' into 'Lok Kalyan Marg' signifies a broader policy shift aimed at shedding colonial baggage and embracing Indian values. केंद्र सरकार की इस 'नेम चेंज पॉलिसी' के तहत केवल सड़कें या इमारतें ही नहीं, बल्कि दशकों पुराने कानूनों और संस्थानों के ढांचे को भी बदला गया है। साल 2015 में 'योजना आयोग' को 'नीति आयोग' बनाकर इस प्रक्रिया की शुरुआत हुई थी, जो अब भारतीय दंड संहिता (IPC) को 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) में बदलने तक पहुंच चुकी है। सरकार के अनुसार, पुराने नाम ब्रिटिश काल की मानसिकता और गुलामी के प्रतीकों को दर्शाते थे, जिन्हें हटाकर अब भारतीय संस्कृति, वीरता और राष्ट्रीय नायकों को सम्मान दिया जा रहा है।

The policy also extends significantly to cities and judicial codes, with 'Allahabad' becoming 'Prayagraj' and 'Aurangabad' renamed as 'Chhatrapati Sambhajinagar' to reflect historical and religious sentiments. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यह बदलाव राज्यों के स्तर पर भी तेजी से लागू हुआ है, जहाँ कई 'राजभवनों' को अब 'लोकभवन' और 'राज निवास' को 'लोक निवास' कहा जाने लगा है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि डलहौजी रोड का नाम 'दारा शिकोह रोड' करना या मुगलसराय स्टेशन को 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन' बनाना राष्ट्रीय गौरव को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है। इन बदलावों के माध्यम से सरकारी तंत्र में 'कर्तव्य बोध' और सार्वजनिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।



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