घरौंडा/सोनीपत: राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए राहत की बड़ी खबर है। केंद्र सरकार टोल वसूली की व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए अब टोल प्लाजा और बैरियरों को पूरी तरह हटाने की तैयारी में है। इसकी जगह 'मल्टी लेन फ्री फ्लो' (MLFF) प्रणाली लागू की जा रही है, जिसका ट्रायल आगामी 26 जनवरी 2026 से हरियाणा के बसताड़ा टोल प्लाजा और गुजरात के चुनिंदा राजमार्गों पर शुरू होगा। The new system features overhead structures equipped with advanced sensors and cameras that will automatically deduct toll tax from moving vehicles, eliminating the need to stop and reducing fuel consumption and travel time. अधिकारियों का दावा है कि इस तकनीक से 100 प्रतिशत टोल वसूली सुनिश्चित होगी और राजस्व की चोरी पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
इस अत्याधुनिक प्रणाली में सड़क के ऊपर विशेष ओवरहेड स्ट्रक्चर लगाए गए हैं, जिनमें फास्टैग सेंसर, हाई-स्पीड नंबर प्लेट रीडर (NPR), लेजर कैमरे और 24-घंटे वीडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम शामिल हैं। यह सिस्टम न केवल टोल काटेगा बल्कि वाहनों की गति (स्पीड) पर भी पैनी नजर रखेगा। यदि कोई वाहन निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करता है, तो अगले 50 मीटर पर लगा दूसरा ओवरहेड सिस्टम उसे ट्रैक कर लेगा और चालान सीधे वाहन मालिक के पते पर भेज दिया जाएगा। This integrated approach aims to make highways smarter and safer by combining revenue collection with real-time traffic rule enforcement.
हादसों को रोकने के लिए एनएचAI ने एक और बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली के मुकरबा चौक से पानीपत तक के 55 किलोमीटर के हिस्से में बीच के डिवाइडर पर आठ फुट ऊंची ग्रिल लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य पैदल यात्रियों को हाईवे पार करने से रोकना है, क्योंकि 2025 में इस क्षेत्र में 418 लोगों की सड़क हादसों में जान जा चुकी है। NHAI believes that by fencing the median and implementing the non-stop toll system, the overall flow of traffic on NH-44 will become significantly safer and more efficient. यदि हरियाणा और गुजरात में यह ट्रायल सफल रहता है, तो जल्द ही इसे पूरे देश के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर लागू कर दिया जाएगा।