नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान में प्रदर्शनकारियों को 'मदद' भेजने और सरकारी संस्थाओं पर कब्जा करने के आह्वान ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में खलबली मचा दी है। इस संभावित सैन्य टकराव की सबसे बड़ी तपिश पड़ोसी देश पाकिस्तान में महसूस की जा रही है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने रावलपिंडी में एक आपातकालीन हाई-लेवल मीटिंग बुलाई है, जिसमें आईएसआई प्रमुख जनरल असीम मलिक और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सहित सेना के तमाम शीर्ष कमांडर शामिल हुए। पाकिस्तान को डर है कि यदि अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो इस्लामाबाद दो पाटों के बीच पिस जाएगा एक तरफ डूरंड लाइन पर अफगानिस्तान से तनाव और दूसरी तरफ ईरान सीमा पर नया मोर्चा खुलने का खतरा।
The Pakistani military leadership is deeply concerned that the U.S. might demand access to its airspace or military bases for operations against Iran, putting Islamabad in a strategic dilemma. सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस बात पर गंभीर मंथन हुआ कि यदि पाकिस्तान अमेरिका को सैन्य ठिकाने देता है, तो देश के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। खुफिया आकलन के मुताबिक, पाकिस्तान की लगभग 30 प्रतिशत शिया आबादी ईरान के प्रति सहानुभूति रखती है, और किसी भी अमेरिकी कार्रवाई में पाकिस्तान की भागीदारी आंतरिक विद्रोह को भड़का सकती है। इसके अलावा, युद्ध की स्थिति में ईरान से आने वाले लाखों शरणार्थियों का बोझ उठाना पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था के लिए असंभव साबित होगा।
The ISI has been directed to accelerate diplomatic talks with regional powers like Saudi Arabia, Turkey, and Qatar to prevent the escalation of conflict in West Asia. अपनी आंतरिक सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए सेना मुख्यालय ने 'नेशनल पैग़ाम-ए-अमन कमेटी' के तहत धार्मिक विद्वानों को भी तलब किया है, ताकि देश में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखा जा सके। पाकिस्तान को यह भी अंदेशा है कि इस क्षेत्रीय अस्थिरता का फायदा उठाकर भारत और अन्य सीमा पार के संगठन मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ सकते हैं। जनरल मुनीर ने सभी कमांडरों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश देते हुए स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान फिलहाल किसी भी नए युद्ध का हिस्सा बनने की स्थिति में नहीं है।