भारत-पाक सीमा पर सुरक्षा सख्त: श्रीगंगानगर में पाकिस्तानी सिम के उपयोग और रात में आवाजाही पर लगा प्रतिबंध



श्रीगंगानगर: राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए राजस्थान के श्रीगंगानगर जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिला मजिस्ट्रेट डॉ. मंजू (District Magistrate Sriganganagar) ने भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में पाकिस्तानी लोकल सिम कार्ड के उपयोग पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रशासन का मानना है कि सीमा पार लगे मोबाइल टावरों का नेटवर्क भारतीय सीमा के भीतर 3 से 4 किलोमीटर तक पहुँचता है, जिसका दुरुपयोग राष्ट्र विरोधी तत्वों द्वारा सूचनाएं साझा करने के लिए किया जा सकता है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS Section 163) की धारा 163 के तहत जारी किया गया है, जो 15 जनवरी से अगले दो माह तक प्रभावी रहेगा।

सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने के लिए बॉर्डर से सटे 3 किलोमीटर के दायरे को रात के समय 'नो-गो जोन' (No-Go Zone) घोषित किया गया है। आदेश के अनुसार, शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे तक इस क्षेत्र में आम लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यह नियम श्रीगंगानगर, श्रीकरणपुर, पदमपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़ और घड़साना जैसे संवेदनशील उपखंडों पर लागू होगा। यदि किसी किसान को सिंचाई या अन्य कृषि कार्यों के लिए सीमावर्ती क्षेत्र में जाना है, तो उसे बीएसएफ (BSF Border Surveillance) या सेना के उच्च अधिकारियों से अनिवार्य रूप से अनुमति लेनी होगी। The strategic move aims to neutralize technical infiltration and secure the vulnerable gaps along the international boundary.

जिला मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति पाकिस्तानी सिम कार्ड का उपयोग करते हुए या प्रतिबंधित समय में सीमा क्षेत्र में पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा एजेंसियों को इन क्षेत्रों में निरंतर पेट्रोलिंग और ड्रोन निगरानी (Drone Monitoring on Border) बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान द्वारा किए जाने वाले तकनीकी संचार और घुसपैठ के प्रयासों को विफल करना है। स्थानीय निवासियों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की सूचना तुरंत राजस्थान पुलिस (Rajasthan Police Helpline) को दें। The 60-day prohibition serves as a critical buffer during high-alert periods to maintain the territorial integrity of the border region.



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