इंदौर: कोविड-19 महामारी के दीर्घकालिक प्रभावों ने अब हड्डियों के स्वास्थ्य पर भी चिंताजनक साया डाल दिया है। इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इंडोकॉन 2026 (Indocon 2026 Orthopedic Conference) के दौरान देश-विदेश के विख्यात डॉक्टरों ने आगाह किया है कि संक्रमण के बाद 'हिप आर्थराइटिस' और कूल्हे के जोड़ों में खराबी के मामलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। कांफ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. हेमंत मंडोवरा (Dr. Hemant Mandovara Indore) के नेतृत्व में आयोजित इस सत्र में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा और बच्चे भी गलत जीवनशैली और दवाओं के अनियंत्रित प्रभाव के कारण हड्डियों की कमजोरी का शिकार हो रहे हैं।
वैज्ञानिक सत्रों के दौरान इंग्लैंड से आए विशेषज्ञ डॉ. अजय मालवीया ने युवाओं में बढ़ती 'हिप जॉइंट' समस्याओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बॉल और सॉकेट के बीच संरचनात्मक असंतुलन के कारण आर्थराइटिस का जोखिम बढ़ रहा है, जिसके लिए हिप प्रिजर्वेशन तकनीक (Hip Preservation Techniques) एक वरदान साबित हो रही है। यह तकनीक कम उम्र के मरीजों में 'जॉइंट रिप्लेसमेंट' की आवश्यकता को भविष्य के लिए टाल देती है, जिससे वे एक सक्रिय जीवनशैली जी सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि कोविड काल में स्टेरॉयड के उपयोग और वर्तमान में शराब के बढ़ते सेवन ने कूल्हे के जोड़ की रक्त-आपूर्ति (Blood Supply) को गंभीर रूप से बाधित किया है। The surge in post-Covid bone complications highlights a critical need for early diagnostic screenings and lifestyle interventions.
नागपुर के वरिष्ठ सर्जन डॉ. सुश्रुत बाभुलकर और गुजरात के डॉ. कश्यप ने सत्र में साझा किया कि संक्रमण के बाद 'ओस्टियोनेक्रोसिस' (हड्डियों का गलना) के मामले तेजी से बढ़े हैं। कॉन्फ्रेंस में 3-डी हिप तकनीक (3D Assisted Hip Surgery) और लाइव वीडियो केस स्टडी के माध्यम से चिकित्सकों को जटिल फ्रैक्चर प्रबंधन का व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। डॉक्टरों ने जनता से अपील की है कि वे कूल्हे या जोड़ों में होने वाले मामूली दर्द को नजरअंदाज न करें और विटामिन-डी व कैल्शियम के स्तर की नियमित जांच कराएं। Recent orthopedic research emphasizes the correlation between lifestyle choices and the accelerated degeneration of joint health in the post-pandemic era.