प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज में जारी माघ मेले के सबसे महत्वपूर्ण पर्व 'मौनी अमावस्या' पर किन्नर अखाड़े ने भव्य और उल्लासपूर्ण तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। महाकुंभ के बाद यह पहला बड़ा अवसर था जब अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में किन्नर संतों ने त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाई। The procession of the Kinnar Akhada was a sight to behold, with saints carrying tridents (trishuls) and drums (damrus), dressed in saffron attire, and chanting 'Jai Shri Ram' as they marched towards the confluence. गोरखपुर की महामंडलेश्वर कनकेश्वरी नंद गिरि के शंखनाद के साथ इस शाही स्नान की शुरुआत हुई, जिसमें विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों और महामंडलेश्वरों ने हिस्सा लिया।
इस धार्मिक आयोजन में झारखंड, पंजाब, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों की अध्यक्षों सहित भारी संख्या में शिष्य और साधु शामिल हुए। संगम तट पर मीडिया से बात करते हुए डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि माघ मास के दौरान तीर्थराज प्रयागराज में स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। She expressed immense joy at seeing the massive gathering of devotees despite the biting cold and thick fog, noting that the presence of the younger generation in such large numbers is a testament to the fact that Sanatan Dharma is flourishing and evolving globally. उन्होंने इस अवसर पर देश के युवाओं की बढ़ती आस्था की विशेष सराहना की।
किन्नर अखाड़े के संतों ने स्नान के पश्चात लोक कल्याण और राष्ट्र की समृद्धि के लिए प्रार्थना की। अखाड़े के संरक्षक दुर्गादास महाराज और यूपी की अध्यक्ष स्वामी कल्याणी नंद गिरि सहित कई प्रमुख चेहरों ने श्रद्धालुओं को मौनी अमावस्या की शुभकामनाएं दीं। This majestic participation of the Kinnar Akhada has added a unique spiritual fervor to the Mauni Amavasya festivities, highlighting the inclusive nature of the Kumbh and Magh Mela traditions. प्रशासन की ओर से अखाड़े के स्नान के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी ताकि बिना किसी बाधा के यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो सके।