चंडीगढ़: साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज की 26वीं कृति ‘हास्य काव्यांजलि’ का भव्य विमोचन सेक्टर-38 स्थित महिला भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान किया गया। इस पुस्तक का लोकार्पण चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. मनमोहन सिंह ने किया। समारोह में साहित्य जगत की कई दिग्गज हस्तियां और समाजसेवी उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रेम विज के लेखन की सूक्ष्मता और समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता की सराहना की। The Launch of Hasya Kavyanjali marks a significant addition to the contemporary satire genre, blending humor with deep social commentary.
पुस्तक के विमोचन अवसर पर डॉ. मनमोहन सिंह ने लेखक को बधाई देते हुए कहा कि हास्य-व्यंग्य का सृजन करना तलवार की धार पर चलने के समान है, क्योंकि इसमें संतुलन बनाए रखना सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। उन्होंने प्रेम विज की इस कृति को मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक विसंगतियों के बीच एक उत्कृष्ट संतुलन का उदाहरण बताया। गौरतलब है कि प्रेम विज की रचनाएं पूर्व में भी कई विश्वविद्यालयों के शोध कार्य (M.Phil) का हिस्सा रही हैं और पंजाब व दिल्ली शिक्षा बोर्ड की पाठ्य-पुस्तकों में भी शामिल की गई हैं। This Literary Milestone by Prem Vij reflects his long-standing commitment to highlighting the absurdities of modern life through sharp, insightful poetry.
‘हास्य काव्यांजलि’ में कुल 52 कविताएं संकलित हैं, जो सरकारी तंत्र की अव्यवस्था, राजनीतिक खोखलेपन, तकनीकी युग में रिश्तों के टकराव और उपभोक्तावाद पर करारा प्रहार करती हैं। लेखक प्रेम विज ने अपनी पुस्तक के बारे में बात करते हुए कहा कि ये कविताएं आम आदमी की रोजमर्रा की जद्दोजहद से उपजी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ये रचनाएं पाठक को केवल हँसाएंगी ही नहीं, बल्कि उन्हें समाज की विडंबनाओं को गहराई से समझने और उन्हें बदलने के लिए प्रेरित भी करेंगी। The Satirical Verses in the Collection target the changing human values amidst urbanization, urging readers to think beyond the laughter.
समारोह में अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. अनीश गर्ग, सचिव सुभाष भास्कर और पुस्तक के संपादक आचार्य राजेश कुमार सहित कई गणमान्य कवि और लेखक उपस्थित थे। आचार्य राजेश कुमार ने कहा कि प्रेम विज ने व्यंग्य के साथ-साथ गहरी करुणा और जीवन-बोध को अपनी रचनाओं में पिरोया है। प्रेम विज के पिछले व्यंग्य संग्रह ‘भीड़ का भूगोल’ और ‘परदे के पीछे’ भी पाठकों के बीच खासे लोकप्रिय रहे हैं। यह नया संग्रह आधुनिकता की दौड़ में पीछे छूटती मानवीय भावनाओं को फिर से केंद्र में लाने का एक सशक्त प्रयास है। This New Satirical Compilation is expected to resonate with readers who seek both entertainment and social awakening in literature.