पंजाब में 'ईजी रजिस्ट्री' का क्रांतिकारी आगाज: अब पटवारी और दलालों के चक्करों से मिली मुक्ति, किसानों के लिए डिजिटल राहत


चंडीगढ़: पंजाब सरकार द्वारा शुरू की गई 'ईजी रजिस्ट्री' और 'ईजी जमाबंदी' सेवा ने राज्य के राजस्व विभाग की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है, जिससे आम जनता और विशेषकर किसानों को बड़ी राहत मिली है। मोहाली से शुरू हुआ यह पायलट प्रोजेक्ट अब पूरे प्रदेश में लागू हो चुका है, जिसके तहत लोग बिना किसी बिचौलिये या एजेंट के घर बैठे अपनी जमीन की रजिस्ट्री करवा सकते हैं। लुधियाना के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी सतनाम सिंह के अनुसार, जिस काम के लिए पहले हफ्तों तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, वह अब डिजिटल प्रणाली के माध्यम से मात्र दो दिनों में संपन्न हो रहा है।

The integration of technology into land records has effectively eliminated the need for intermediaries, providing farmers with instant access to certified documents via WhatsApp. किसानों के लिए सबसे बड़ी सुविधा 'ईजी जमाबंदी' के रूप में आई है, जहाँ अब उन्हें प्रमाणित दस्तावेज के लिए पटवारी के पीछे नहीं भागना पड़ता। क्यूआर कोड (QR Code) और डिजिटल हस्ताक्षर युक्त ये दस्तावेज न केवल विश्वसनीय हैं, बल्कि बैंक लोन और सरकारी योजनाओं के लिए भी तुरंत मान्य हैं। इसके अलावा, इंतकाल (Mutation) की प्रक्रिया में भी तेजी आई है; जो काम पहले महीनों तक लटका रहता था, वह अब अनिवार्य रूप से 30 दिनों के भीतर अपडेट किया जा रहा है।

With 99% of village land records now digitized across Punjab, the role of local middlemen has almost vanished, ensuring transparency and reducing corruption. राज्य सरकार का दावा है कि इस पारदर्शिता से न केवल लोगों का समय और पैसा बच रहा है, बल्कि उन्हें मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिली है। डिजिटल रिकॉर्ड्स की उपलब्धता ने जमीन की खरीद-फरोख्त में होने वाली धोखाधड़ी की गुंजाइश को भी न्यूनतम कर दिया है। यह पहल पंजाब के कृषि क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रही है, क्योंकि अब किसानों को अपनी ही जमीन के रिकॉर्ड के लिए किसी की 'मिन्नत' करने की जरूरत नहीं रह गई है।



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