लिज्जत पापड़ की 'शक्ति स्तंभ' पुष्पा बेरी का 91 वर्ष की आयु में निधन: एक कमरे से शुरू कर खड़ा किया अंतरराष्ट्रीय साम्राज्य, 4000 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर



जबलपुर: भारत के प्रसिद्ध महिला गृह उद्योग 'लिज्जत पापड़' को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली प्रख्यात महिला उद्योगपति पुष्पा बेरी का शनिवार को 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं और जबलपुर के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। पुष्पा बेरी ने न केवल एक सफल व्यवसाय स्थापित किया, बल्कि "जो काम करे वह मालिक" के सिद्धांत पर चलते हुए लगभग 4,000 महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाया। उनके निधन की खबर से जबलपुर समेत देश के उद्योग जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार गुप्तेश्वर मुक्तिधाम में किया गया, जहाँ उनके बेटों रसिम और असिम बेरी ने उन्हें मुखाग्नि दी।

Born in Moga, Punjab, in 1934, Pushpa Beri moved to Jabalpur after her marriage in 1952. वर्ष 1974 में समाजसेवी शांतिलाल शाह की सलाह पर उन्होंने 'श्री महिला गृह उद्योग' की नींव रखी। राइट टाउन स्थित एक छोटे से कमरे से शुरू हुआ यह सफर समय के साथ इतना बड़ा हुआ कि इनके पापड़ और अचार की महक अमेरिका और ब्रिटेन तक जा पहुंची। पुष्पा बेरी की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे अपनी सहकर्मियों को कर्मचारी नहीं बल्कि 'सह-मालिक' मानती थीं और होने वाले मुनाफे को सभी महिलाओं में बराबर बांटती थीं। फरवरी 2024 में ही उनकी संस्था ने अपनी स्थापना के गौरवमयी 50 वर्ष पूरे किए थे।

Pushpa Beri's life was a testament to the power of grassroots entrepreneurship and women's empowerment in post-independence India. वे हमेशा अपनी महिला साथियों के सुख-दुख में खड़ी रहती थीं, यही कारण था कि उनके चौथा पुल स्थित आवास पर हमेशा महिलाओं का तांता लगा रहता था। गुणवत्ता के प्रति उनके कड़े आग्रह ने 'लिज्जत' को एक विश्वसनीय वैश्विक ब्रांड बना दिया। उनके जाने से जबलपुर ने एक ऐसी समाज सुधारक और उद्यमी को खो दिया है जिसने घर की चौखट के भीतर सिमटी महिलाओं को आर्थिक आजादी का रास्ता दिखाया। उनकी विरासत आज भी उन हजारों परिवारों में जीवित है, जिनका चूल्हा उनके द्वारा शुरू किए गए इस महान कार्य से जलता है।


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