लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर हो रहे बवाल पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश में कोई भी कानून रातों-रात या अचानक नहीं आता, बल्कि उसके पीछे एक लंबी संवैधानिक प्रक्रिया और विशेषज्ञों की राय होती है। निषाद ने सवर्ण समाज द्वारा किए जा रहे विरोध पर सवाल उठाते हुए याद दिलाया कि जब जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था, तब देश में शांति थी और किसी ने विरोध नहीं किया था। The Cabinet Minister's Remarks have added a fresh political layer to the ongoing debate over the UGC's anti-discrimination guidelines.
संजय निषाद ने तर्क दिया कि यूजीसी के 'इक्विटी रूल्स 2026' का निर्माण संबंधित आयोगों की विस्तृत रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने कहा कि जब आरक्षण और समानता की बात आती है, तो संवैधानिक प्रावधानों का सम्मान सभी को करना चाहिए। उनके अनुसार, सरकार की मंशा किसी एक वर्ग के साथ अन्याय करने की नहीं, बल्कि सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करने की है। मंत्री ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे तथ्यों को गहराई से समझें और केवल राजनीतिक उकसावे में आकर विरोध न करें। This Call for Dialogue emphasizes the importance of following constitutional procedures while expressing dissent in a democracy.
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबको अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यह संवाद के दायरे में होना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार द्वारा लिए गए ये फैसले देश के शिक्षा तंत्र को समावेशी और मजबूत बनाएंगे। संजय निषाद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सवर्ण छात्र संगठन इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताकर सड़कों पर उतरे हुए हैं। निषाद का रुख स्पष्ट करता है कि सरकार इन सुधारों को सामाजिक न्याय की दिशा में एक आवश्यक कदम मान रही है। The Political Support for UGC Reforms from ally parties indicates a unified stand by the ruling coalition on the matter of social equity in higher education.