अंबाला/पटियाला: हरियाणा-पंजाब के शंभू बॉर्डर पर पिछले लंबे समय से डटे किसान संगठनों ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 'दिल्ली कूच' का एलान कर दिया है। किसान नेताओं ने घोषणा की है कि आगामी 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर हजारों की संख्या में किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली की ओर बढ़ेंगे। किसानों का कहना है कि एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी और स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने जैसी उनकी मांगों पर सरकार का रवैया अब भी उदासीन बना हुआ है। इस एलान के बाद हरियाणा और दिल्ली पुलिस ने सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है, साथ ही खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके।
The farmer unions stated that the symbolic march on Republic Day is intended to remind the government of the promises made during the previous protests and to demand immediate legislative action on their core issues. किसान नेताओं सरवन सिंह पंढेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल ने स्पष्ट किया है कि यह मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण होगा, लेकिन यदि उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया गया तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। वर्तमान में शंभू और खनौरी बॉर्डर पर भारी संख्या में किसान पहले से ही मौजूद हैं और नए एलान के बाद गांवों से और अधिक जत्थे पहुंचने की संभावना है। दूसरी ओर, सरकार ने बातचीत के द्वार खुले होने की बात कही है, लेकिन किसान बिना ठोस गारंटी के पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
The upcoming march has raised concerns about potential traffic disruptions on the National Highway-44, which connects Delhi with Punjab and Jammu-Kashmir. प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अंबाला और कुरुक्षेत्र के पास रूट डायवर्जन प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। 2021 के ट्रैक्टर मार्च के दौरान हुई हिंसा को देखते हुए इस बार सुरक्षा बल अधिक सतर्कता बरत रहे हैं। किसानों ने अपील की है कि उनके इस आंदोलन को राजनीतिक चश्मे से न देखा जाए, क्योंकि यह उनके अस्तित्व की लड़ाई है। 26 जनवरी की तारीख करीब आते ही अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार किसानों को रोकने के लिए फिर से सख्त कदम उठाएगी या फिर बातचीत के जरिए कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा।