सुमाया ग्रुप पर ईडी का शिकंजा: 137 करोड़ के घोटाले में 35 करोड़ की संपत्ति जब्त, प्रमोटर उशिक गाला गिरफ्तार



मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल ऑफिस ने सुमाया ग्रुप और उसके प्रमोटरों के खिलाफ मनी Laundering जांच में एक बड़ी सफलता हासिल की है। एजेंसी ने पीएमएलए, 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए सुमाया ग्रुप की लगभग 35.22 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। इन संपत्तियों में भारी बैंक बैलेंस, डीमैट होल्डिंग्स, म्यूचुअल फंड और दो महत्वपूर्ण अचल संपत्तियां शामिल हैं। यह पूरी जांच मुंबई के वर्ली पुलिस स्टेशन में दर्ज उस प्राथमिकी (FIR) पर आधारित है, जिसमें सुमाया इंडस्ट्रीज लिमिटेड और उसके प्रमोटरों पर 'नीड टू फीड प्रोग्राम' के नाम पर 137 करोड़ रुपए के गबन का आरोप लगाया गया था।

The investigation into Suumaya Group has unmasked a sophisticated financial fraud where the company allegedly fabricated a bogus contract with the Haryana Government to secure trade financing. ईडी की जांच के अनुसार, प्रमोटर उशिक गाला ने हरियाणा सरकार के एक गैर-मौजूद 'नीड टू फीड' कार्यक्रम का झांसा देकर भारी-भरकम फंड जुटाया। इस फंड को दिल्ली और हरियाणा की फर्जी कृषि व्यापारी संस्थाओं के जरिए डायवर्ट किया गया। वास्तव में कोई कृषि खरीद नहीं हुई थी, बल्कि नकली चालान और लॉरी रसीदों के माध्यम से केवल कागजों पर व्यापार दिखाया गया। यह पैसा अंततः शेल कंपनियों के एक जटिल जाल के माध्यम से नकद और आरटीजीएस के रूप में वापस उशिक गाला के पास ही पहुंचा।

The group's listed entities manipulated their financials to such an extent that their turnover skyrocketed from ₹210 crore to a staggering ₹6,700 crore within just two years through circular trading. इस 5,000 करोड़ रुपए के चक्रिय लेनदेन (Circular Trading) में से केवल 10 प्रतिशत ही असली व्यापार था। इस फर्जी टर्नओवर के कारण शेयर की कीमतों में कृत्रिम रूप से भारी उछाल आया, जिससे आम निवेशक धोखे का शिकार हुए। ईडी ने इससे पहले मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम में 19 स्थानों पर छापेमारी कर 3.9 करोड़ रुपए की संपत्ति और महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेज बरामद किए थे। मुख्य आरोपी उशिक गाला को 17 नवंबर को गिरफ्तार किया जा चुका है और वर्तमान में एजेंसी इस घोटाले की गहरी परतों को खंगालने में जुटी है ताकि सभी दोषियों को सजा मिल सके।



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