नई दिल्ली/वॉशिंगटन: जनवरी 2026 के अंत में मध्य पूर्व (Middle East) एक भीषण युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए 'USS अब्राहम लिंकन' एयरक्राफ्ट कैरियर के नेतृत्व में 10 युद्धपोतों का एक विशाल बेड़ा (Massive Armada) ईरान के करीब तैनात कर दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे "ब्यूटीफुल आर्मडा" करार देते हुए कहा कि यदि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद नहीं किया और प्रदर्शनकारियों पर हो रहे दमन को नहीं रोका, तो अमेरिकी सेना "गति और हिंसा" (Speed and Violence) के साथ कार्रवाई करने के लिए तैयार है। ट्रंप ने स्पष्ट संदेश दिया है— "या तो समझौता करो, या अंजाम भुगतो।"
ईरान ने इस सैन्य तैनाती को खुली धमकी मानते हुए पलटवार किया है। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि उनकी सेना की "उंगलियां ट्रिगर पर" हैं और किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब "पूरी ताकत और तत्काल" दिया जाएगा। तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध शुरू हुआ तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकाने और युद्धपोत उनके निशाने पर होंगे। ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है और कहा है कि वह परमाणु अधिकारों पर किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
इस तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति भी सक्रिय हो गई है। Turkey (तुर्किये) ने मध्यस्थता की पेशकश की है और ईरानी विदेश मंत्री आज अंकारा में तुर्किये के अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं ताकि युद्ध को टाला जा सके। वहीं, इज़राइल और सऊदी अरब के शीर्ष रक्षा अधिकारी वॉशिंगटन में ट्रंप प्रशासन के साथ बैठकें कर रहे हैं। जहाँ इज़राइल ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई का पक्षधर है, वहीं सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी धरती का उपयोग ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि बातचीत विफल रही, तो यह तनाव एक ऐसे क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है जो दशकों तक दुनिया को अस्थिर रखेगा।