UGC की नई गाइडलाइंस पर संत समाज का कड़ा एतराज: स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने पीएम मोदी से की हस्तक्षेप की मांग, बोले ‘यह हिंदुओं को बांटने की साजिश’


वाराणसी: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी 'हायर एजुकेशन रेगुलेशंस' की नई गाइडलाइंस को लेकर देश भर में विवाद गहराता जा रहा है। अब इस मुद्दे पर संत समाज ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को चेतावनी दी है। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने वाराणसी में इस नियमावली पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे हिंदू समाज और सवर्ण युवाओं के साथ खुला भेदभाव करार दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि इस भेदभावपूर्ण नीति को बनाने वाले अधिकारियों और यूजीसी अध्यक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उनसे तत्काल इस्तीफा लिया जाए। The UGC Equity in Higher Education Regulations 2026 have triggered a massive backlash from the spiritual community, claiming it threatens the unity of the Hindu society.

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने नई नियमावली की आलोचना करते हुए कहा कि ये नियम देश के युवाओं के मन में विभाजन और हीन भावना पैदा करने वाले हैं। उनका आरोप है कि नई गाइडलाइंस में झूठी शिकायतें दर्ज कराने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान नहीं रखा गया है, जिससे सवर्ण वर्ग के छात्र और शिक्षक उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने तीखा सवाल करते हुए पूछा कि क्या अब देश में 'ऊंची जाति में जन्म लेना अपराध' बन गया है? संत समिति का मानना है कि यह फैसला 'एक राष्ट्र, एक मन' की भावना के विपरीत है और समाज को कई वर्गों में बांटने की कोशिश है। This Outcry by Akhil Bhartiya Sant Samiti emphasizes the potential misuse of regulations and the perceived exclusion of general category students from fair grievance redressal.

गौरतलब है कि यूजीसी ने इस साल उच्च शिक्षण संस्थानों में एससी, एसटी, ओबीसी, महिलाओं और दिव्यांग छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए पुराने नियमों में बदलाव करते हुए नए 'इक्विटी रेगुलेशंस' लागू किए हैं। इसके तहत जांच के लिए दो अलग-अलग केंद्र और समितियों के गठन का प्रावधान है। हालांकि, विरोध कर रहे वर्गों का कहना है कि ये नियम निष्पक्षता के बजाय एकतरफा दबाव बनाने का काम करेंगे। स्वामी जितेंद्रानंद ने स्पष्ट किया कि संविधान सभी को समानता का अधिकार देता है, लेकिन यूजीसी की नई नियमावली इस मूल अधिकार का हनन कर रही है। The Implementation of New Grievance Committees by UGC is being viewed as a regressive step by those demanding merit-based and non-discriminatory administrative policies in universities.

संत समाज के इस विरोध के बाद अब यह मामला राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। इससे पहले सवर्ण समाज के कई संगठनों ने भी इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया था। अखिल भारतीय संत समिति ने सरकार से इन गाइडलाइंस की तत्काल समीक्षा करने और इसमें आवश्यक संशोधन करने की अपील की है, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो। जानकारों का मानना है कि यदि सरकार ने इस पर जल्द कोई रुख साफ नहीं किया, तो यह विरोध आने वाले समय में एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है। The Demands for Immediate Review of UGC Rules reflect a growing anxiety among the general category about their legal safeguards in higher educational environments.


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