उत्तराखंड में UCC का एक साल सफल: हलाला और तीन तलाक पर लगा पूर्ण विराम, अब 'पहचान छिपाकर शादी' करने पर होगी जेल



देहरादून: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू हुए एक वर्ष पूरा हो गया है, जिसे राज्य सरकार ने ‘यूसीसी दिवस’ के रूप में मनाया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि पिछले एक साल में प्रदेश में हलाला, बहुविवाह और तीन तलाक का एक भी मामला सामने नहीं आया है। कानून के प्रति जनता के बढ़ते विश्वास का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में विवाह पंजीकरण (Marriage Registration) की दर 67 प्रतिदिन से बढ़कर अब 1400 प्रतिदिन तक पहुँच गई है। The First Anniversary of UCC in Uttarakhand marks a transformative era in social justice, effectively curbing regressive practices and promoting legal documentation of marriages.

यूसीसी की पहली वर्षगांठ के ठीक एक दिन पहले, राज्य सरकार ने 'उत्तराखंड समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026' लागू कर दिया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) गुरमीत सिंह की मंजूरी के बाद यह नया कानून तत्काल प्रभाव से प्रभावी हो गया है। इस संशोधन में सबसे कड़ा प्रावधान विवाह के दौरान पहचान छिपाने या धोखाधड़ी करने वालों के लिए किया गया है। अब यदि कोई व्यक्ति अपनी धार्मिक पहचान या अन्य जानकारी छिपाकर विवाह करता है, तो न केवल उस विवाह को अमान्य घोषित किया जाएगा, बल्कि दोषी को कठोर दंडात्मक सजा भी भुगतनी होगी। This New UCC Amendment Ordinance 2026 introduces stringent penalties for identity fraud in marriages and live-in relationships to ensure the safety and dignity of citizens.

संशोधित कानून के तहत अब वर्ष 2010 से 26 जनवरी 2025 के बीच विवाह करने वाले सभी दंपतियों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, लिव-इन संबंधों (Live-in Relationships) को लेकर भी नियमों को और पारदर्शी बनाया गया है। अब संबंध खत्म होने पर रजिस्ट्रार द्वारा बाकायदा 'टर्मिनेशन सर्टिफिकेट' जारी किया जाएगा। प्रशासनिक सुधारों के तहत अब रजिस्ट्रार जनरल का पद केवल अपर सचिव स्तर के अधिकारी को ही दिया जाएगा, जिन्हें पंजीकरण रद्द करने जैसी महत्वपूर्ण शक्तियां प्रदान की गई हैं। The Mandatory Registration Clause and new protocols for live-in relationships aim to provide legal security to partners and resolve inheritance disputes more effectively.

मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि यूसीसी को अब नए केंद्रीय कानूनों भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के अनुरूप अपडेट कर दिया गया है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस संकल्प को लोग 'असंभव' बता रहे थे, उसे धरातल पर उतारकर उत्तराखंड ने पूरे देश को एक नई राह दिखाई है। आगामी बजट सत्र में इस अध्यादेश को विधेयक के रूप में विधानसभा में पारित कराया जाएगा। This Legal Modernization in Uttarakhand underscores the state's commitment to gender equality and a uniform legal framework for all citizens, irrespective of their religious affiliations.


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