वाराणसी: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद मकर संक्रांति का महापर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। गुरुवार भोर से ही दशाश्वमेध, अस्सी, शीतला और राजेंद्र प्रसाद घाट समेत सभी प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा है। गंगा की लहरों में आस्था की डुबकी लगाने के बाद लोग घाटों पर ही तिल, गुड़, खिचड़ी और ऊनी वस्त्रों का दान कर रहे हैं। बाबा विश्वनाथ के धाम में भी भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है, जहाँ 'हर-हर महादेव' के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजायमान है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही खरमास समाप्त हो गया है और आज से सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो गई है।
The auspicious 'Punya Kaal' for bathing and charity began early morning on January 15 and will remain highly fruitful until 3 PM, as devotees follow the Udaya Tithi. सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए वाराणसी प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए हैं। शहर के प्रमुख मार्गों विशेषकर गोदौलिया से मैदागिन तक 'नो व्हीकल जोन' घोषित किया गया है ताकि पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो। गंगा में जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें मुस्तैद हैं, जो नौकाओं के जरिए लगातार गश्त कर रही हैं। प्रशासन का अनुमान है कि आज शाम तक करीब चार लाख से अधिक श्रद्धालु गंगा स्नान और बाबा के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाएंगे।
The tradition of 'Khichari' donation is at its peak near the Dashashwamedh area, where people are generously donating rice, pulses, and black sesame to the needy. यातायात पुलिस ने भीड़ को देखते हुए भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है और शहर के कई रूटों को डायवर्ट किया गया है। मकर संक्रांति के इस पावन अवसर पर वाराणसी की गलियों से लेकर घाटों तक सिर्फ उत्सव और भक्ति का माहौल नजर आ रहा है। बटुक भैरव मंदिर के महंत जितेंद्र मोहन पूरी के अनुसार, आज का दिन सूर्य देव की उपासना के लिए सर्वश्रेष्ठ है, जो जीवन में नई ऊर्जा और सुख-समृद्धि का संचार करता है।