शिमला की यादें और गुरु का आशीर्वाद: 53 साल बाद संगीत गुरु सोम दत्त बट्टू से मिले अनुपम खेर, भावुक होकर छुए पैर



गुरुग्राम: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर (Anupam Kher) ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे भावुक क्षणों में से एक को सोशल मीडिया पर साझा किया है। 53 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, अभिनेता ने अपने संगीत गुरु प्रोफेसर सोम दत्त बट्टू (Som Dutt Battu) से मुलाकात की। अनुपम खेर ने बताया कि प्रो. बट्टू वर्ष 1972-73 में शिमला स्थित राजकीय महाविद्यालय (Government College, Shimla) में उनके संगीत शिक्षक थे। गुरुजी न केवल उन्हें संगीत सिखाते थे, बल्कि उस दौर में कॉलेज के नाटकों के लिए संगीत की रचना भी करते थे। अनुपम खेर इन दिनों गुरुग्राम में अपनी आगामी फिल्म 'खोसला का घोसला-2' (Khosla Ka Ghosla 2) की शूटिंग कर रहे हैं, और इसी दौरान उन्हें अपने गुरु से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

अभिनेता ने इस मुलाकात का एक दिल छू लेने वाला वीडियो शेयर किया है। उन्होंने लिखा कि इतने दशकों बाद भी जब गुरुजी ने उन्हें 'बेटा' कहकर पुकारा, तो वह भावुक हो गए। अनुपम खेर के अनुसार, इस उम्र में उनकी मां के अलावा केवल उनके गुरुजी ही हैं जो उन्हें इस स्नेहपूर्ण संबोधन से बुलाते हैं। उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि भारत सरकार ने वर्ष 2024 में प्रो. सोम दत्त बट्टू को कला के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए प्रतिष्ठित Padma Shri सम्मान से नवाजा था। अनुपम खेर ने कहा कि पुराने समय के शिक्षक केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाते थे।

अनुपम खेर का हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से बेहद गहरा और भावनात्मक लगाव है। उनका बचपन शिमला की वादियों में ही बीता है और उनके परिवार की जड़ें आज भी वहीं से जुड़ी हुई हैं। शिमला के प्रति अपने प्रेम को वह अक्सर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर साझा करते रहते हैं। वह अक्सर अपने पुराने दोस्तों और वहां के स्थानीय लोगों के साथ बिताए गए किस्सों को याद करते हैं। अनुपम खेर का मानना है कि शिमला की गलियों और वहां के गुरुओं से मिली शिक्षा ने ही उन्हें आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।

गुरु-शिष्य की यह अनूठी भेंट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है, जिसे देखकर लोग अभिनेता की सादगी और संस्कारों की प्रशंसा कर रहे हैं। अनुपम खेर ने संदेश दिया कि सफलता की कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाएं, लेकिन अपनी जड़ों और अपने गुरुओं का सम्मान कभी नहीं भूलना चाहिए। उनकी यह मुलाकात दर्शाती है कि शिमला का वह छात्र आज भी अपने भीतर उसी पुराने परिवेश और गुरु-भक्ति को संजोए हुए है।



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