बैजनाथ (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश की शिवनगरी बैजनाथ में आयोजित राज्य स्तरीय शिवरात्रि महोत्सव (Shivratri Festival) इस बार देवी-देवताओं की दिव्य मौजूदगी से सराबोर है। विज्ञान और तकनीक के इस दौर में भी लोगों की अटूट आस्था का नजारा तब देखने को मिला, जब छोटा भंगाल घाटी के दुर्गम रास्तों और बर्फीले दर्रों को पार कर 'न्याय के देवता' माने जाने वाले देव गहरी (Dev Gehri) 10 दिनों की लंबी पैदल यात्रा के बाद बैजनाथ पहुंचे। मंडी और कांगड़ा जिलों के दूरदराज क्षेत्रों से आए इन देवी-देवताओं की पालकियों और देवलुओं के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान है।
देव गहरी के साथ आए कमेटी प्रधान संजय ठाकुर और गुर हलकू राम ने बताया कि यह देवता न्याय के प्रतीक हैं; जब कोर्ट-कचहरी से हारकर कोई निराश होता है, तो देवता की शरण में उसे सच्चा न्याय मिलता है। महोत्सव में पहली बार इतने बड़े स्तर पर देवी-देवताओं ने शिरकत की है, जिनमें से कोई असाध्य बीमारियों के इलाज, कोई जादू-टोना बेअसर करने, तो कोई प्राकृतिक आपदा की सटीक भविष्यवाणी करने के लिए प्रसिद्ध है। इन देवताओं के सानिध्य में सात्विक नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है, जहाँ चमड़े की वस्तुएं या तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित है।
महोत्सव में देव शक्तियों के कई और अलौकिक रूप भी देखने को मिल रहे हैं। जोगिंद्रनगर के आरठ गांव से आई मां चतुर्भुजा की गुर पानो देवी ने बताया कि माता 25 वर्ष पूर्व स्वयंभू प्रकट हुई थीं। वहीं, मां नवदुर्गा और जगजननी महाकाली तुलाह के गुरों ने भी अपनी चमत्कारिक शक्तियों और परंपराओं का विवरण साझा किया। देव गहरी संगरेहड़ के गुर भाग सिंह ने बताया कि देवता विशेष रूप से बीमारियों को दूर करने के लिए विख्यात हैं और कठिन रास्तों को लांघकर यहाँ शिव धाम पहुंचे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि आधुनिक चिकित्सा जहाँ हार मान लेती है, वहाँ इन देव शक्तियों का आशीर्वाद काम आता है।
महोत्सव समिति के अध्यक्ष संकल्प गौतम ने कहा कि प्रशासन ने कांगड़ा और मंडी से आए सभी बजंतरियों, पुजारियों और गुरों के लिए रहने और भोजन की पुख्ता व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि महोत्सव के समापन पर सभी देवी-देवताओं को सम्मानपूर्वक 'नजराना' (Najarana) भेंट कर विदा किया जाएगा। बैजनाथ में उमड़ा यह जनसैलाब प्रमाणित करता है कि हिमाचल की Dev Sanskriti आज भी जनमानस के हृदय में उतनी ही जीवंत है जितनी सदियों पहले थी।