नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में जानलेवा होते वायु प्रदूषण (Air Pollution) पर लगाम लगाने के लिए सरकार अब तक का सबसे सख्त कदम उठाने जा रही है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक नया रोडमैप तैयार कर रहा है, जिसके तहत दिल्ली की सड़कों से BS-I, BS-II और BS-III श्रेणी के पुराने वाहनों को पूरी तरह से हटाने की योजना है। इतना ही नहीं, अगले पांच वर्षों में BS-IV वाहनों को भी चरणबद्ध तरीके से बाहर करने पर विचार किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य जहरीली हवा के कारण बढ़ रही सांस संबंधी बीमारियों से नागरिकों को बचाना है।
IIT मद्रास के प्रोफेसर अशोक झुनझुनवाला की अध्यक्षता वाली समिति ने इस ड्राफ्ट को तैयार किया है। समिति ने एक चौंकाने वाला तथ्य साझा किया है कि जब दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 250 के पार जाता है, तो एक नवजात बच्चा अनजाने में रोजाना 10 से 15 सिगरेट के बराबर धुआं सांस के जरिए शरीर के अंदर लेता है। इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए समिति ने सिफारिश की है कि कम प्रदूषण फैलाने वाले इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों को प्राथमिकता दी जाए।
नए रोडमैप के अनुसार, अप्रैल 2027 के बाद पंजीकृत होने वाले सभी नए कमर्शियल दोपहिया वाहन और टैक्सियां अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक या 'जीरो-एमिशन' श्रेणी की होनी चाहिए। कमर्शियल वाहनों पर सख्ती इसलिए अधिक है क्योंकि वे निजी गाड़ियों की तुलना में कई गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं। हालांकि, सरकार आम जनता की सुविधा का भी ध्यान रख रही है; BS-VI वाहनों के मालिकों को 10 से 15 साल का ट्रांजिशन पीरियड देने का प्रस्ताव है ताकि उन पर अचानक आर्थिक बोझ न पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि नवंबर से जनवरी के बीच, जब प्रदूषण का स्तर चरम पर होता है, तब BS-IV वाहनों के इस्तेमाल को सीमित किया जा सकता है। सरकार इस प्रस्ताव पर विभिन्न हितधारकों से फीडबैक ले रही है, जिसके बाद इसे अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा। यह कदम दिल्ली-एनसीआर को Clean Air की ओर ले जाने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।