गुरुग्राम: हरियाणा के साइबर सिटी गुरुग्राम में पुलिस की Economic Offences Wing (आर्थिक अपराध शाखा) और अपराध शाखा ने दो बड़ी कामयाबियां हासिल की हैं। पहले मामले में पुलिस ने करोड़ों की धोखाधड़ी के आरोप में डिप्टी एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर सरोज देवी को पंजाब के जीरकपुर से गिरफ्तार किया है। 50 वर्षीय आरोपी महिला अधिकारी पर आरोप है कि उसने सनसिटी प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों के साथ मिलकर फर्जी अलॉटमेंट लेटर और कन्वीनयंस डीड तैयार की और सेक्टर-54 स्थित एक बेशकीमती प्लॉट को अपने और अपनी साथी राजबाला के नाम करवा लिया। इसके बाद इस प्लॉट को 3 Crore 40 Lakh Rupees में किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया, जिसमें से 1.70 करोड़ रुपये सरोज देवी के हिस्से आए थे।
Gurgaon Police की जांच में सामने आया कि यह प्लॉट मूल रूप से एक व्यक्ति ने 2004 में बुक किया था, जिसकी मृत्यु के बाद उसके वारिसों ने इसे अपने नाम करवाने की कोशिश की थी। लेकिन धोखाधड़ी कर इसे हड़प लिया गया। आरोपी सरोज देवी वर्तमान में बहादुरगढ़ में तैनात थी और हाल ही में उसका तबादला नारनौल हुआ था। पुलिस अब उसे रिमांड पर लेकर ठगी गई राशि बरामद करने और उसके अन्य साथियों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।
दूसरे मामले में, गुरुग्राम पुलिस की अपराध शाखा सेक्टर-17 ने द्वारका एक्सप्रेस-वे और आसपास के इलाकों में लिफ्ट मांगकर लूटपाट करने वाले एक शातिर गिरोह को दबोचा है। इस गिरोह में 3 Transgenders सहित कुल चार सदस्य शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद शाकिब उर्फ हीर, प्रियंका, शोभा और कयामुद्दीन के रूप में हुई है। ये आरोपी योजनाबद्ध तरीके से कार चालकों से लिफ्ट मांगते थे और गाड़ी में बैठने के बाद चालक को अपनी बातों में उलझाकर या शारीरिक रूप से विचलित कर उनके गले से सोने की चेन और अन्य कीमती सामान पार कर देते थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई कार, 1 Gold Chain और नकदी बरामद की है। पूछताछ के दौरान इस गैंग ने शहर में कई अन्य वारदातों को अंजाम देने की बात कबूल की है। पुलिस ने ट्रांसजेंडर आरोपियों और उनके चालक साथी को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया है। गुरुग्राम पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अनजान लोगों को अपनी गाड़ी में लिफ्ट देने से बचें और सतर्क रहें।
दोनों ही मामलों में पुलिस की तत्परता ने सफेदपोश अपराधियों और सड़क पर सक्रिय लुटेरों के हौसले पस्त कर दिए हैं। पुलिस प्रशासन अब आरोपियों के पिछले आपराधिक रिकॉर्ड को भी खंगाल रहा है ताकि अन्य अनसुलझी कड़ियों को जोड़ा जा सके।