डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की पैरोल खत्म: कड़ी सुरक्षा के बीच लौटा सुनारियां जेल, 40 दिन बाद बैरक में वापसी



रोहतक (हरियाणा): साध्वी यौन शोषण और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की 40 दिनों की पैरोल अवधि रविवार को समाप्त हो गई। निर्धारित समय पूरा होने के बाद, राम रहीम रविवार शाम को भारी पुलिस सुरक्षा और कड़े पहरे के बीच वापस रोहतक की Sunaria Jail पहुँच गया। पैरोल के दौरान वह प्रशासन द्वारा तय की गई सख्त शर्तों के तहत सिरसा स्थित अपने डेरे में रुका हुआ था।

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में पंचकूला स्थित CBI Special Court ने गुरमीत सिंह को दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म का दोषी पाते हुए 20-20 साल की सजा सुनाई थी। इसके अतिरिक्त, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के गंभीर मामले में भी उसे उम्रकैद की सजा दी गई है। तब से वह रोहतक की जेल में ही बंद है। पैरोल अवधि के दौरान डेरा प्रमुख की गतिविधियों पर प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की पैनी नजर रही।

जेल प्रशासन के मुताबिक, पैरोल की समय सीमा समाप्त होते ही राम रहीम ने तय प्रोटोकॉल के तहत जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया। जेल के मुख्य गेट पर उनकी विधिवत एंट्री की गई और चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उन्हें उनकी पुरानी बैरक में वापस भेज दिया गया। सुरक्षा कारणों से जेल परिसर के बाहर और आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। Haryana Police ने जेल वापसी के रास्ते पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।

राम रहीम को समय-समय पर मिलने वाली फरलो (Furlough) और पैरोल को लेकर अक्सर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में बहस छिड़ती रही है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि यह जेल नियमों और विधिक प्रक्रियाओं के तहत ही दी जाती है। फिलहाल, डेरा प्रमुख अपनी शेष सजा सुनारियां जेल की सलाखों के पीछे ही काटेगा।



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