हिमाचल बिजली बोर्ड का नहीं होगा निजीकरण: विधानसभा में बरसे सीएम सुक्खू, बोले- OPS और जनकल्याणकारी योजनाएं रहेंगी जारी


शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में राज्य बिजली बोर्ड के भविष्य को लेकर चल रही सभी अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है। मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि राज्य बिजली बोर्ड का किसी भी सूरत में निजीकरण (Privatization) नहीं किया जाएगा और सरकार इसे कमजोर करने के बजाय और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर भी अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार इस फैसले से किसी भी दबाव में पीछे नहीं हटेगी। राजस्व घाटा अनुदान (RDG) पर हुई चर्चा के दौरान विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने साफ किया कि हिमकेयर और सहारा जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाएं बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे गंभीर मुद्दों पर ठोस चर्चा करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। सीपीएस और ओएसडी की नियुक्तियों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के समय भी इसी तरह के वेतनमान दिए जाते थे, लेकिन वर्तमान सरकार ने व्यवस्था को पारदर्शी बनाकर भ्रष्टाचार के चोर दरवाजे बंद कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश पर 17 हजार करोड़ रुपए की वित्तीय सीमाओं और पूर्व सरकार से मिली Jal Jeevan Mission की ₹1150 करोड़ की देनदारी के बावजूद सरकार हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की ओर अग्रसर है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने जश्न मनाने के बजाय आपदा प्रभावितों को मुआवजा देने और मकान निर्माण में सहायता पहुँचाने को प्राथमिकता दी है।

मुख्यमंत्री ने सदन में दो टूक कहा कि उनकी सरकार अब तक अपनी 7 मुख्य गारंटियां पूरी कर चुकी है और आरडीजी कोई खैरात नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक हक है। उन्होंने विपक्ष को प्रस्ताव दिया कि वे नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में केंद्र सरकार के पास जाकर हिमाचल के हक की बात करने को तैयार हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन का उनका संकल्प अडिग है और सीमित संसाधनों के बावजूद विकास की गति को थमने नहीं दिया जाएगा।



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