शिमला (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश में इन दिनों मौसम के दो विपरीत रूप देखने को मिल रहे हैं। जहाँ एक ओर राज्य के अधिकांश मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फरवरी के महीने में ही मार्च जैसी गर्मी का अहसास हो रहा है, वहीं दूसरी ओर जनजातीय क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड का दौर जारी है। मौसम विभाग (IMD Shimla) के अनुसार, सोमवार को पूरे प्रदेश में धूप खिली रहने और मौसम शुष्क रहने की संभावना है। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से सप्ताह के मध्य में हिमालय की ऊँचाइयों पर हलचल बढ़ने वाली है, जिससे पर्यटन स्थलों पर बर्फबारी की उम्मीद जगी है।
वर्तमान में राज्य के न्यूनतम तापमान में कोई विशेष बड़ा फेरबदल नहीं हुआ है, लेकिन लाहुल-स्पीति का ताबो (Tabo) प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका बना हुआ है, जहाँ बीती रात पारा -6.9 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। इसके अलावा कुकुमसेरी और कल्पा जैसे क्षेत्रों में भी तापमान शून्य से नीचे बना हुआ है। चिंताजनक पहलू यह है कि ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा जैसे जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से 3 से 7 डिग्री सेल्सियस अधिक बना हुआ है, जो समय से पहले गर्मी की दस्तक की ओर इशारा कर रहा है।
आगामी दिनों का पूर्वानुमान
17 और 18 फरवरी: मौसम विभाग ने ताजा बुलेटिन जारी कर राज्य के ऊपरी और ऊँचाई वाले क्षेत्रों जैसे लाहुल-स्पीति, किन्नौर और कुल्लू की चोटियों पर हल्की बारिश के साथ हिमपात (Snowfall) होने की संभावना जताई है।
19 फरवरी से बदलाव: इस संक्षिप्त मौसमी हलचल के बाद 19 फरवरी से आसमान फिर से साफ हो जाएगा और पूरे प्रदेश में शुष्कता लौट आएगी।
तापमान में आ रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर प्रदेश की Agriculture और बागवानी पर पड़ सकता है, विशेषकर सेब के बगीचों के लिए आवश्यक 'चिलिंग आवर्स' में कमी आ सकती है। मौसम विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सलाह दी है कि ऊँचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले मौसम की ताजा जानकारी अवश्य लें। राज्य में फरवरी के दौरान अब तक सामान्य से करीब 68% कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे सूखे जैसे हालात और भी गंभीर हो गए हैं।