इमरान खान की सेहत पर सस्पेंस: बिना बताए जेल से अस्पताल शिफ्ट करने पर भड़की PTI, 'विजन लॉस' की खबरों से पाकिस्तान में हड़कंप



इस्लामाबाद (पाकिस्तान): पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और PTI प्रमुख इमरान खान (Imran Khan) की सेहत को लेकर एक बार फिर कयासों का बाजार गर्म हो गया है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने जेल प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि 73 वर्षीय इमरान खान को उनके परिवार और निजी डॉक्टरों को सूचित किए बिना गुप्त रूप से अस्पताल शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है। पार्टी ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन और इमरान खान की जान के साथ खिलवाड़ करार दिया है। गौरतलब है कि अगस्त 2023 से भ्रष्टाचार के आरोपों में Adiala Jail में बंद इमरान खान की शारीरिक स्थिति पिछले कुछ महीनों में काफी बिगड़ी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान खान की दाहिनी आंख में लगभग 85 प्रतिशत विजन लॉस (दृष्टि हानि) हो चुका है। परिवार और उनकी लीगल टीम का आरोप है कि जेल अधिकारियों ने समय पर उचित मेडिकल केयर उपलब्ध नहीं कराई, जिससे स्थिति गंभीर हो गई। हालांकि, पाकिस्तान सरकार के सूचना मंत्री ने स्पष्ट किया है कि उन्हें विशेष नेत्र उपचार के लिए ले जाया जा रहा है, लेकिन पीटीआई का तर्क है कि जेल नियमों के तहत किसी भी मेडिकल ट्रांसफर से पहले परिवार की सहमति और निजी डॉक्टरों की मौजूदगी अनिवार्य है।

इस मुद्दे ने पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल ला दिया है। शुक्रवार को विपक्षी गठबंधन ने संसद के बाहर विशाल धरना दिया और मांग की कि इमरान खान को तुरंत Al-Shifa Hospital में भर्ती कराया जाए। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of Pakistan) ने भी विजन लॉस की रिपोर्ट्स पर संज्ञान लेते हुए एक उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है। पीटीआई का कहना है कि जनवरी 2026 में भी एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया बिना परिवार को बताए की गई थी, जिससे प्रशासन की मंशा पर संदेह पैदा होता है।

जेल के भीतर गिरती सेहत और राजनीतिक अस्थिरता के बीच इमरान खान के समर्थकों में भारी आक्रोश है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इमरान खान के स्वास्थ्य के साथ कोई भी अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी वर्तमान सरकार और जेल प्रशासन की होगी। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इस मामले पर नजर बनाए रखी है। फिलहाल, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी संभावित हिंसक प्रदर्शन को रोका जा सके।


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