भारत-कनाडा व्यापारिक रिश्तों में जमी बर्फ पिघली: उच्चायुक्त का बड़ा बयान 'शादी' जैसा होगा CEPA समझौता, जल्द शुरू होगी वार्ता



कनाडा: भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से लंबित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर एक अत्यंत सकारात्मक और उत्साहजनक खबर सामने आई है। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक डील अब ज्यादा दूर नहीं है। एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय अखबार को दिए साक्षात्कार में पटनायक ने कहा कि यह समझौता "बिल्कुल भी मुश्किल" नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार, औपचारिक व्यापार वार्ताएं फरवरी के अंत या मार्च 2026 की शुरुआत में फिर से शुरू हो सकती हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपनी संसद को 90 दिन का अनिवार्य नोटिस भी दे दिया है। उच्चायुक्त ने भारत और कनाडा के इस रणनीतिक व्यापारिक गठबंधन की तुलना एक "शादी" से की है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस प्रकार विवाह में आपसी संबंधों को सुगम बनाने के लिए बाधाओं को हटाया जाता है, ठीक उसी तरह CEPA व्यापारिक टैरिफ और अड़चनों को खत्म कर दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को एक सूत्र में पिरोने का काम करेगा।

किन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा विशेष ध्यान?

यह प्रस्तावित समझौता केवल वस्तुओं के लेन-देन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसमें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है:

डिफेंस और एयरोस्पेस: दोनों देश रक्षा उत्पादन और तकनीक साझा करने पर जोर देंगे।

माइनिंग और एनर्जी: कनाडा के प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों का लाभ भारतीय उद्योगों को मिलेगा।

रिसर्च, इनोवेशन और AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक शोध के क्षेत्र में संयुक्त निवेश की योजना है।

निवेश और लॉजिस्टिक्स: कस्टम्स प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा और निवेश के मार्ग में आने वाले Non-Tariff Barriers को हटाया जाएगा।

पिछले दो वर्षों में कूटनीतिक स्तर पर आई "छोटी-सी खरोंच" के बावजूद, भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक आंकड़े मजबूती की कहानी बयां कर रहे हैं। वर्ष 2024 में भारत का कनाडा को निर्यात 8.02 अरब कनाडाई डॉलर रहा, जबकि आयात 5.30 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुँच गया। उच्चायुक्त ने यह भी खुलासा किया कि रिश्तों को नई गहराई देने के लिए जल्द ही 'Canada-India Friendship Society' की शुरुआत की जा सकती है, जिससे सांसदों और नागरिक समाज के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा।



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