वाराणसी (उत्तर प्रदेश): धर्म और आध्यात्म की नगरी वाराणसी में इस बार महाशिवरात्रि का पर्व एक ऐतिहासिक और वैश्विक एकता का गवाह बना। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (Kashi Vishwanath Temple) के दरबार में इस वर्ष एक नई और भव्य परंपरा का श्रीगणेश किया गया है, जिसके तहत देश-विदेश के 62 प्रतिष्ठित मंदिरों से प्राप्त पावन भेंट भगवान विश्वेश्वर महादेव को अर्पित की गईं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इन विशेष भेंटों में विभिन्न तीर्थों के पावन वस्त्र, पवित्र रज (मिट्टी) और पवित्र जल शामिल हैं, जो वैश्विक स्तर पर सनातन धर्म की एकजुटता को प्रदर्शित करते हैं।
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) विश्व भूषण मिश्रा ने रविवार को जानकारी साझा करते हुए बताया कि बाबा विश्वनाथ के लिए यह उपहार केवल भारत के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार श्रीलंका और मलेशिया जैसे देशों के मंदिरों से भी आए हैं। इन उपहारों में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, उत्तराखंड के बाबा केदारनाथ, मुंबई के प्रसिद्ध लाल बाग राजा और श्री सिद्धिविनायक मंदिर, गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर तथा राजस्थान के श्रीनाथजी नाथद्वारा मंदिर की विशेष सामग्री शामिल है।
इस अनूठी पहल के पीछे का मुख्य उद्देश्य 'वसुधैव कुटुंबकम' की भारतीय विचारधारा को धरातल पर उतारना और संपूर्ण सनातन समाज को एक सूत्र में पिरोना है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के आदान-प्रदान से वैश्विक आध्यात्मिक एकता को और अधिक मजबूती मिलेगी। पहली बार शुरू की गई इस परंपरा ने वाराणसी आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भारी कौतूहल और गौरव का भाव भर दिया है।
वाराणसी पुलिस और मंदिर प्रशासन ने महाशिवरात्रि के इस विशेष आयोजन के लिए सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप Kashi Vishwanath Dham के विस्तार के बाद यह पहला अवसर है जब इतनी बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंदिरों ने एक-दूसरे के साथ आध्यात्मिक संबंध साझा किए हैं। इस पहल की सराहना करते हुए भक्तों ने इसे भारतीय संस्कृति के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बताया है।